
कोटा. बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले लाडपुरा विधायक भवानीसिंह राजावत ने सोमवार को फिर एक विवादित बयान दे डाला है। राजावत ने कहा कि आबादी क्षेत्रों में आए दिन घुसने वाले मगरमच्छों को चंबल नदी में मत डालो बल्कि उन्हें गोली मार दो। इनसे लोगों को खतरा है।
राजावत ने बयान जारी कर कहा कि मगरमच्छों के आए दिन आबादी क्षेत्र में घुसने व वन विभाग द्वारा उन्हें पकड़कर चम्बल में डालना चिंता का विषय है। एक दशक में ही हजारों मगरमच्छ चम्बल में डाले जा चुके हैं।
कोई जमाना था जब सैकड़ों लोग किशोरपुरा, शिवपुरा, भीतरिया कुण्ड, मौजी बाबा की गुफा आदि स्थानों पर बने घाटों पर स्नान करने जाया करते थे, लेकिन अब मगरमच्छों के आतंक के कारण चम्बल के घाट वीरान पड़े रहते हैं।
हजारों घडिय़ालों और मगरमच्छों के मल मूत्र विसर्जन से नदी का पानी भी प्रदूषित हो गया है। मगरमच्छ चम्बल किनारे के बंदरों को शिकार बना रहे हैं। ऐसे में आबादी क्षेत्र में निकलने वाले मगरमच्छों को चम्बल नदी में डालने के बजाय गोली मार देनी चाहिए।
चन्द्रलोई में आश्रय स्थल बनाया
राजावत ने कहा कि चन्द्रलोई नदी तो मगरमच्छों का आश्रय स्थल बन गई है। इसमें लगभग तीन हजार मगरमच्छ हैं जो नरभक्षी हो चुके हैं, क्योंकि रसायनों के दूषित पानी के नाले नदी में मिलने से इनका भोजन मछलियां मर जाती हैं और यह भूखे मगरमच्छ खेड़ारसूलपुर, चड़ीन्दा, भोजपुरा, हनुवतखेड़ा, राजनगर, मण्डानिया, दसलाना, जगन्नाथपुरा, अर्जुनपुरा, चन्द्रेसल, नोटाना, रामखेड़ली, खेड़ली पाण्ड्या आदि गांवों के खेतों में आ जाते हैं और भेड़ बकरियों, बछड़ों आदि को शिकार बनाते हैं। कई लोगों पर हमला कर चुके हैं। यहां नदी किनारे कई जगह लिखा भी है कि यहां मगरमच्छों से खतरा है, नदी में जाना मना है।
तीन से सात साल की सजा का प्रावधान
मगरमच्छ शिड्यूल एक की श्रेणी का जीव है। यह शिड्यूल एक श्रेणी के भाग दो में बिन्दु -1 डी में अंकित है, वहीं क्रोकोडाइल बिन्दु -2 पर अंकित है। यह महत्वपूर्ण जीव है।
इसे टाइगर व पेंथर की तरह से संरक्षण दिया गया है। भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 व संशोधित अधिनियम 2006 के अनुसार इसे मारने पर 3 से 7 वर्ष तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान है।
वी.के. सालवान, पूर्व वन अधिकारी