Patrika Women Safety Campaign: कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ जाता है, जिसकी शिकायत थाने तक पहुंचती है। महिला थाना पुलिस दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराकर आपसी सहमति बनाने का प्रयास करती है।
Mahila Suraksha Abhiyan: महिला सुरक्षा और पारिवारिक स्थायित्व को प्राथमिकता देते हुए कोटा पुलिस की पहल रंग लाई है। बीते तीन वर्षों में महिला थाने ने 658 महिलाओं के परिवारों को टूटने से बचाया है। पुलिस ने समझाइश और काउंसलिंग के जरिए परिवारों को फिर से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। हर साल महिला थाने में एक हजार से अधिक परिवाद दर्ज होते हैं, लेकिन सभी मामलों में मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता। 2024 में महिला थाने में कुल 1024 परिवाद आए, जिनमें से 658 मामलों को पुलिस ने शुरुआती स्तर पर ही सुलझा दिया। इस पहल से न केवल मुकदमों की संख्या घटी, बल्कि परिवारों में सामंजस्य बढ़ा है।
पिछले तीन वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि 50 प्रतिशत मामलों में पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर विवाद सुलझाने में सफलता हासिल की है। पुलिस का प्रयास रहा है कि कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण को अपनाया जाए, ताकि परिवारों में शांति बनी रहे। इस पहल का सकारात्मक असर यह हुआ कि वर्ष 2024 में महिला थाने में दर्ज मुकदमों की संख्या सबसे कम रही। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि किसी परिवार का टूटना नहीं, बल्कि उसे बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ जाता है, जिसकी शिकायत थाने तक पहुंचती है। महिला थाना पुलिस दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराकर आपसी सहमति बनाने का प्रयास करती है। एडिशनल एसपी कोटा सिटी दिलीप सैनी ने बताया कि पुलिस की कोशिश यही रहती है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात को समझें और फिर से साथ रहने को तैयार हो जाएं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे सिर्फ कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज में शांति और सहयोग बढ़ाने की भी कोशिश करते हैं। पुलिस मानती है कि यदि सही समय पर विवादों को सुलझा लिया जाए, तो कई परिवारों को टूटने से बचाया जा सकता है।
पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 में सबसे कम मुकदमे दर्ज हुए, जिससे यह साफ होता है कि पुलिस की समझाइश और मध्यस्थता की प्रक्रिया सफल रही है।
2022 - 436 - 304 - 130
2023 - 414 - 306 - 101
2024 - 366 - 266 - 63