कोरोना की पहली लहर पर दूसरी लहर भारी पड़ी। अकेले कोविड अस्पताल में 12 माह चलने वाले ऑक्सीजन सिलेण्डर इस बार दो माह में खत्म हो गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह आपदा कितनी खतरनाक थी।
कोटा. कोरोना की पहली लहर पर दूसरी लहर भारी पड़ी। अकेले कोविड अस्पताल में 12 माह चलने वाले ऑक्सीजन सिलेण्डर इस बार दो माह में खत्म हो गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह आपदा कितनी खतरनाक थी।
पत्रिका ने मेडिकल कॉलेज से जानकारी जुटाई तो कोविड अस्पताल में इस साल 2021 में अप्रेल व मई में दो माह में 54 हजार 408 सिलेण्डर व 19 हजार एमएलओ आया। इससे 19 हजार 990 सिलेण्डर बने यानी कुल 74 हजार 398 सिलेण्डर की खपत हुई। निजी अस्पतालों में अप्रेल में 16000 व मई में 27855 ऑक्सीजन सिलेण्डर सप्लाई हुए। जबकि घरों में 3785 ऑक्सीजन सिलेण्डर की सप्लाई हुए। कुल 1 लाख 76 हजार 446 सिलेण्डरों की खपत हुई है।
जामनगर व भिवाड़ी ने लौटाए प्राण
जब कोटा में ऑक्सीजन की कमी हुई तो चारों तरफ हाहाकार मचा। सारे अस्पताल फुल हो गए। ऑक्सीजन की कमी हो गई। दवाइयां खत्म हो गई थी। केन्द्र व राज्य सरकार की मदद से जामनगर व भिवाड़ी से ऑक्सीजन टैंक मंगवाकर मरीजों को प्राणवायु दी गई। अस्पतालों में जगह नहीं मिलने से निजी ऑक्सीजन प्लांट से भी घरों में सिलेण्डरों की आपूर्ति हुई।
पहली बार ऑक्सीजन मरीज 600 पार
इस साल अप्रेल व मई में कुल 600 से अधिक मरीज ऑक्सीजन पर निर्भर वाले भर्ती हुए। इससे आईसीयू व ऑक्सीजन बेड्स की कमी बनी। ऑक्सीजन की कमी होने से पहली बार सरकारी अस्पताल के द्वार मरीजों के लिए बंद हुए। चिकित्सकों ने भी मरीजों के इलाज नहीं करने को लेकर हाथ खड़े कर दिए थे। जबकि पिछले साल कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन वाले अधिकतम 250 मरीज भर्ती रहे थे।
तीनों जिलों में भी मचा था हाहाकार
झालावाड़, बारां व बूंदी में भी कोरोना की दूसरी लहर में हाहाकार मचा। तीनों जिलों में कुल करीब 66373 ऑक्सीजन सिलेण्डरों की खपत हुई। जबकि पिछले साल 2020 में करीब 11840 सिलेण्डरों की खपत हुई।
फैक्ट- एक नजर इन आंकड़ों पर
कोविड अस्पताल
अप्रेल व मई
54 हजार 408 सिलेण्डर
19 हजार एमएलओ यानी 19,990 सिलेण्डर की खपत
(29 मई तक के आंकड़े)
कोटा ऑक्सीजन प्लांट से 29 अप्रेल से 27 मई तक 3785ऑक्सीजन सिलेण्डर घरों में सप्लाई हुए।
निजी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेण्डर सप्लाई
16000 अप्रेल में
27855 मई में
ऐसे पड़ी जरूरत...
पहली लहर में हाई फ्लो ऑक्सीजन वाले 10 से 20 प्रतिशत मरीजों को 15 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी।
इस बार 60 प्रतिशत मरीजों को हाई फ्लो 15 से 50 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी।
यह रही मरीजों की संख्या...
पहले कोविड अस्पताल में करीब 250 मरीजों को आईसीयू बेड्स की जरूरत पड़ी।
इसबार 600 से अधिक मरीजों को आईसीयू बेड्स की जरूरत पड़ी।
ऐसे किया वार
पहली लहर में संक्रमण ने फेफड़ों के नीचे हिस्से पर वार किया था।
इस बार दूसरी लहर में संक्रमण ने पूरे फेफड़ों को डैमेज किया।
पहले सिटी स्कोर 15 से 20 तक था। इस बार 25 में से 25 तक भी रहा।
हाड़ौती के तीनों जिले में सिलेण्डर खपत की स्थिति
पिछले साल की खपत
8000- झालावाड़
600- बारां
3240- बूंदी
इस साल अप्रेल-मई की खपत
50900- झालावाड़
5000- बूंदी
10473- बारां
इनका यह कहना
कोरोना की दूसरी लहर के स्ट्रेन में बदलाव आया है। इस कारण बाइलेट्रेल न्यूमोनिया तीव्रता से और जल्दी हुआ। सेचुरेशन में भी गिरावट रही। इससे मरीजों में गंभीरता ज्यादा रही और अधिकतर मरीज हाईफ्लो ऑक्सीजन व एनआईवी पर रहे। इससे ऑक्सीजन की खपत ज्यादा बढ़ी। इस वायरस का प्रभाव युवाओं में ज्यादा देखने को मिला।
डॉ. विजय सरदाना, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज