Reality of health drinks in Hindi: आज के इस लेख में, आइए हेल्थ ड्रिंक्स के नाम पर बाजार में बिकने वाले उत्पादों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जो असल में चीनी से भरे हुए हैं।
Health Drinks Ki Sachai: आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर काफी ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। इसी जागरूकता के चलते, माता-पिता अपने बच्चों में न्यूट्रिशन की कमी को पूरा करने, उनकी लंबाई बढ़ाने, याददाश्त तेज करने और उन्हें ऊर्जावान बनाए रखने के लिए अक्सर विज्ञापनों पर भरोसा कर हेल्थ ड्रिंक्स जैसी चीजों को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लेते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिस ड्रिंक को आप इतना हेल्दी समझ रहे हैं, उसमें कितनी सच्चाई है? क्या वे वाकई शरीर को जरूरी पोषक तत्व दे रहे हैं या सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं? आज के इस लेख में, आइए हेल्थ ड्रिंक्स के नाम पर बाजार में बिकने वाले उत्पादों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जो असल में चीनी से भरे हुए हैं।
बाजार में मिलने वाले ज्यादातर हेल्थ ड्रिंक्स के पीछे जो सामग्री और पोषण लेबल लगा होता है, उसमें सही जानकारी नहीं दी गई होती या उसे घुमा-फिराकर लिखा जाता है। इसके चलते ज्यादातर लोग इससे होने वाले नुकसान को समझ नहीं पाते। कंपनियां बड़ी चालाकी से चीनी जैसे सीधे शब्द की जगह माल्टोडेक्सट्रिन, लिक्विड ग्लूकोज, सुक्रोज और माल्ट एक्सट्रैक्ट जैसे तकनीकी नामों का इस्तेमाल करती हैं ताकि एक आम ग्राहक इसे पहचान न पाए। अगर आप बाजार के लोकप्रिय ब्रांड्स के कुल वजन को देखें, तो उसका 25% से 50% हिस्सा केवल चीनी के इन्हीं अलग-अलग रूपों से भरा होगा। इसका मतलब है कि अगर आप दो चम्मच पाउडर दूध में मिलाकर पी रहे हैं, तो आप पोषण के नाम पर अनजाने में लगभग डेढ़ से दो चम्मच चीनी खा रहे हैं।
बाजार में मिलने वाले इन ड्रिंक्स से होने वाले नुकसान की एक बड़ी वजह यह है कि हेल्थ ड्रिंक जैसा कोई शब्द कानूनी तौर पर तय ही नहीं किया गया है। इसी बात का फायदा उठाकर कंपनियां अपने विज्ञापनों में हेल्थ शब्द लगाकर इन उत्पादों को धड़ल्ले से बेचती हैं।
हेल्थ ड्रिंक्स में मौजूद यह एक्स्ट्रा चीनी सेहत के लिए एक साइलेंट किलर की तरह काम कर रही है। जब कोई खाली पेट इस ज्यादा चीनी वाले ड्रिंक को पीता है, तो खून में इंसुलिन का लेवल अचानक तेजी से बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने से मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बहुत बढ़ जाता है। इसके अलावा, यह ज्यादा मिठास दिमाग पर भी असर डालती है। इससे बच्चों को सादे दूध या घर के बने खाने के बजाय सिर्फ बहुत मीठी चीजों की लत लग जाती है।
एक समझदार ग्राहक बनने के लिए हमेशा खरीदारी करते समय विज्ञापनों के दावों पर नहीं, बल्कि डिब्बे के पीछे लिखी सामग्री सूची (Ingredient List) पर भरोसा करें।