लखनऊ

Ramdas Athawale mega rally 2026: आठवले की महारैली: 5 लाख भीड़ का दावा, तभी तय होगी चुनाव रणनीति

Athawale Rally: रामदास आठवले ने कहा कि यूपी में 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला 26 नवंबर 2026 को लखनऊ में होने वाली बड़ी रैली के बाद किया जाएगा।

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Apr 25, 2026
5 लाख भीड़ का दावा, 26 नवंबर 2026 को महारैली, 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला बाद में (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Ramdas Athawale mega rally in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई हलचल पैदा करते हुए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के अध्यक्ष और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी प्रदेश में 25 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन इस पर अंतिम फैसला 26 नवंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित होने वाली विशाल रैली के बाद ही लिया जाएगा।

इस रैली को लेकर पार्टी ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। आठवले ने दावा किया कि इस आयोजन में करीब 5 लाख लोगों की भीड़ जुटेगी, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा संदेश देने का काम करेगी।

रैली के बाद तय होगी चुनावी रणनीति

रामदास आठवले ने स्पष्ट किया कि फिलहाल पार्टी 25 सीटों पर चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर काम कर रही है, लेकिन अंतिम निर्णय जनता की भागीदारी और रैली की सफलता को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह रैली केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि यह पार्टी की ताकत और जनाधार का प्रदर्शन भी करेगी। रैली के बाद ही यह तय किया जाएगा कि पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी या स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरेगी।

5 लाख भीड़ जुटाने का लक्ष्य

आठवले ने रैली को ऐतिहासिक बनाने का दावा करते हुए कहा कि इसमें करीब 5 लाख लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को अभी से तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर जिले से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक लखनऊ पहुंचेंगे, जिससे यह रैली एक विशाल जनसभा का रूप लेगी।

दलित राजनीति में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश

RPI लंबे समय से उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। दलित बाहुल्य क्षेत्रों में पार्टी अपने जनाधार को बढ़ाने के लिए सक्रिय है। आठवले का मानना है कि उनकी पार्टी अब केवल सहयोगी दल बनकर नहीं रहना चाहती, बल्कि खुद एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभरना चाहती है। यही कारण है कि 25 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है।

बीजेपी के साथ गठबंधन पर सस्पेंस

हालांकि केंद्र में RPI और बीजेपी के बीच मजबूत गठबंधन है, लेकिन उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। आठवले ने संकेत दिए कि यदि उनकी पार्टी को सम्मानजनक सीटें मिलती हैं, तो गठबंधन जारी रहेगा। लेकिन अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो RPI स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय ले सकती है।

रैली के जरिए शक्ति प्रदर्शन

मीडिया प्रवक्ता एस पी सिंह  का मानना है कि यह रैली केवल संगठनात्मक मजबूती का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी है। इस रैली के जरिए RPI यह दिखाना चाहती है कि उसके पास मजबूत जनाधार है और वह किसी भी बड़े राजनीतिक समीकरण को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। इससे पार्टी की सौदेबाजी की ताकत भी बढ़ सकती है।

कार्यकर्ताओं में उत्साह

इस घोषणा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जिला और मंडल स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों को रैली में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।

लखनऊ बनेगा राजनीतिक केंद्र

26 नवंबर को होने वाली यह रैली लखनऊ को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बना देगी। विभिन्न राजनीतिक दलों की नजर इस आयोजन पर टिकी रहेगी, क्योंकि इसके जरिए आने वाले चुनावों के समीकरण तय हो सकते हैं।

विपक्ष पर भी साधा निशाना

आठवले ने अपने बयान में विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टियां केवल बयानबाजी तक सीमित हैं, जबकि RPI जमीनी स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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