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Lucknow अग्निकांड में इंसानियत की मिसाल: जोधपुर टीम ने बनाए 100 कूल शेल्टर, बेघरों को बड़ी राहत

Lucknow अग्निकांड के बाद जोधपुर से आई टीम ने 100 ताप-रोधी शेल्टर बनाकर बेघर परिवारों को राहत दी, जिससे भीषण गर्मी और लू से बचाव संभव हो सका।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Apr 25, 2026

बेघर हुए परिवारों को भीषण गर्मी से राहत (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

बेघर हुए परिवारों को भीषण गर्मी से राहत (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Lucknow Fire: राजधानी लखनऊ के विकासनगर क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जहां सैकड़ों परिवारों का आशियाना उजड़ गया, वहीं राजस्थान के जोधपुर से आई एक संस्था ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश की। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ धवल दर्जी के नेतृत्व में ट्रू होप फाउंडेशन की टीम ने प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर राहत कार्यों को नई दिशा दी और बेघर हुए लोगों के लिए 100 ताप-रोधी शेल्टर तैयार कर दिए। यह पहल न केवल तत्काल राहत देने में कारगर साबित हुई, बल्कि भीषण गर्मी और लू के बीच खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवारों के लिए एक सुरक्षित आश्रय भी बन गई।

अग्निकांड के बाद बेघर हुए सैकड़ों परिवार

विकास नगर क्षेत्र में हुए इस अग्निकांड ने कई परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। आग की लपटों में घर, सामान और वर्षों की जमा पूंजी सब कुछ जलकर खाक हो गया। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए थे। दिन में तेज धूप और रात में असुरक्षा की भावना ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी थीं।

 जोधपुर से आई मदद की टीम

ऐसे कठिन समय में जोधपुर से टीम मौके पर पहुंची। संस्था के प्रमुख धवल दर्जी, जो आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अनुभवी हैं, ने हालात का जायजा लिया और तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिए। उन्होंने बताया कि केवल राशन या कपड़े देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सबसे जरूरी है प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना।

100 ताप-रोधी शेल्टर बनाए गए

संस्था ने प्रभावित क्षेत्र में कुल 100 ताप-रोधी शेल्टर स्थापित किए। प्रत्येक शेल्टर का आकार लगभग 10x20 फीट रखा गया, ताकि एक परिवार आराम से उसमें रह सके। इन शेल्टरों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे तेज धूप और लू से बचाव कर सकें। विशेष सामग्री से बने ये ढांचे गर्मी को अंदर आने से रोकते हैं और अंदर का तापमान बाहर की तुलना में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक कम रखते हैं।

गर्मी से राहत का प्रभावी समाधान

उत्तर प्रदेश में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी के बीच यह पहल बेहद कारगर साबित हुई। जहां बाहर तापमान 40 डिग्री से ऊपर जा रहा था, वहीं इन शेल्टरों के अंदर रहने वाले लोगों को अपेक्षाकृत ठंडा वातावरण मिला। इससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को काफी राहत मिली और उनका स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहा।

केवल आश्रय ही नहीं, जरूरी सहयोग भी

फाउंडेशन की टीम ने केवल शेल्टर बनाकर ही राहत नहीं दी, बल्कि प्रभावित परिवारों को अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई। टीम ने लोगों की जरूरतों को समझते हुए उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया, जिससे वे इस कठिन समय को थोड़ी आसानी से पार कर सकें।

स्थानीय लोगों ने की सराहना

इस पहल की स्थानीय लोगों और प्रशासन ने भी सराहना की है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि इस मदद ने उनके लिए बड़ी राहत का काम किया है। कई लोगों ने बताया कि भीषण गर्मी में खुले में रहना बेहद कठिन था, लेकिन इन शेल्टरों ने उन्हें सुरक्षित और आरामदायक जगह दी।

अनुभव का सही उपयोग

धवल दर्जी ने बताया कि राजस्थान जैसे गर्म प्रदेश में काम करने का उनका अनुभव इस पहल में काम आया। उन्होंने कहा कि वहां की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जो तकनीक विकसित की गई थी, उसे लखनऊ में लागू कर जरूरतमंदों तक पहुंचाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत देना नहीं, बल्कि लोगों को ऐसा समाधान देना है जो उनके जीवन को सुरक्षित बनाए।

आपदा प्रबंधन का नया मॉडल

प्रत्यक्षदर्शी  का मानना है कि यह पहल आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया मॉडल पेश करती है। अक्सर राहत कार्यों में केवल खाद्य सामग्री या कपड़ों पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन सुरक्षित और आरामदायक आश्रय की व्यवस्था उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। इस तरह के ताप-रोधी शेल्टर भविष्य में अन्य आपदाओं के दौरान भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

 प्रशासन और संस्थाओं के लिए प्रेरणा

 यह पहल अन्य सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक इकाइयों के लिए भी प्रेरणादायक है। यह दिखाता है कि सही योजना और तकनीक के साथ राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।