उत्तराखंड के देहरादून में ये मामला सामने आया था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अल्पना थापा के मुताबिक पांच जुलाई 2022 को 16 वर्षीय एक बालक की मां ने बसंत विहार थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। कहा था कि उनकी ननद पति से अनबन के चलते छह महीने मायके में रह रही है। इसी दौरान […]
उत्तराखंड के देहरादून में ये मामला सामने आया था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अल्पना थापा के मुताबिक पांच जुलाई 2022 को 16 वर्षीय एक बालक की मां ने बसंत विहार थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। कहा था कि उनकी ननद पति से अनबन के चलते छह महीने मायके में रह रही है। इसी दौरान उनकी ननद ने 16 वर्षीय सौतेले भतीजे से यौन संबंध बनाए। कुछ दिन पहले वह भतीजे को साथ लेकर लापता हो गई थी। वापस लौटी तो ननद गर्भवती थी। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपी बुआ को नौ जुलाई को 2022 को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
कोर्ट में ट्रायल के दौरान पीड़ित बालक अपने बयान में दोषी ठहराई गई बुआ के पक्ष में चला गया था। उसने कहा कि घटना के वक्त उसकी आयु 18 वर्ष थी। परिजनों ने स्कूल में दाखिला कराते वक्त उम्र दो साल कम लिखवाई थी। उसने दोषी ठहराई गई महिला के संबंध बनाने के लिए जोर जबरदस्ती करने से भी इनकार किया था। मुख्य पीड़ित के आरोपों से मुकरने के बावजूद कोर्ट में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया। कहा कि कोर्ट में बालक के शैक्षिक दस्तावेज में घटना के वक्त उम्र 16 वर्ष साबित हुई।
गर्भवती होने के चलते उसे 2 जनवरी 2023 को कोर्ट से आरोपी बुआ को जमानत मिल गई थी। इसके बाद उसने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची की डीएनए जांच कराई तो वह पीड़ित बालक से मिला। कोर्ट में केस ट्रायल पर आया बालक लैंगिक हमले के आरोप से पलट गया। उसने कहा कि बुआ के साथ उसने अपनी सहमति से संबंध बनाए थे।
इसके तहत दोषी ठहराए गई महिला को बीस साल कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने वारंट बनाकर महिला को सजा काटने के लिए जेल भेज दिया। ट्रायल के दौरान अभियोजन की ओर से छह गवाह और 14 दस्तावेजी साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए।