
IAS रिंकू सिंह राही का इस्तीफा, सिस्टम पर गंभीर आरोप, बोले- काम करने का मौका नहीं मिला (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
IAS Rinku Singh Rahi Resignation: उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही (2023 बैच) ने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। अपने विस्तृत इस्तीफा पत्र में उन्होंने न केवल व्यक्तिगत पीड़ा जाहिर की, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राही ने कहा कि उन्हें प्रभावी ढंग से काम करने का अवसर नहीं दिया गया और व्यवस्था के भीतर “संवैधानिक ढांचे के समानांतर एक अलग सिस्टम” काम कर रहा है। उनके इस्तीफे को केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
रिंकू सिंह राही ने अपने इस्तीफा पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि उन्हें जिम्मेदार पद पर रहते हुए भी काम करने का अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना है कि एसडीएम के रूप में उन्होंने जो कार्रवाई की, उसके बाद उन्हें साइडलाइन कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें वेतन तो मिलता रहा, लेकिन जनसेवा करने का वास्तविक अवसर उनसे छीन लिया गया। ऐसे में उन्होंने अपने पद पर बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं समझा और इस्तीफा देने का फैसला किया।
राही ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि सरकारी सिस्टम के भीतर एक “पैरेलल सिस्टम” काम कर रहा है, जो संवैधानिक व्यवस्था को प्रभावित करता है। उनके इस बयान ने प्रशासनिक हलकों में बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। यदि एक आईएएस अधिकारी खुद ऐसी बातें कह रहा है, तो यह व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
हाल ही में रिंकू सिंह राही उस समय चर्चा में आए थे, जब शाहजहांपुर में वकीलों के एक प्रदर्शन के दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में वह धरना स्थल पर उठक-बैठक करते नजर आए थे। इस घटना के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से अटैच कर दिया गया था और बाद में राजस्व परिषद में भेज दिया गया। हालांकि, तब से उन्हें कोई सक्रिय फील्ड पोस्टिंग नहीं मिली थी।
सूत्रों के अनुसार, राही को पिछले कुछ समय से कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। इससे वह असंतुष्ट थे और कई बार उन्होंने इस स्थिति को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। उनका कहना था कि एक अधिकारी का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा करना होता है, लेकिन जब उसे काम ही नहीं दिया जाए, तो उसकी भूमिका केवल औपचारिक बनकर रह जाती है।
रिंकू सिंह राही का नाम इससे पहले भी सुर्खियों में रह चुका है। वर्ष 2009 में, जब वह मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात थे, तब उन्होंने एक बड़े घोटाले का खुलासा किया था। इस खुलासे के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगी थीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी लड़ाई जारी रखी। इस घटना ने उन्हें एक साहसी और ईमानदार अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई थी।
अपने इस्तीफे को राही ने एक “नैतिक निर्णय” बताया है। उनका कहना है कि जब वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर पा रहे थे, तो पद पर बने रहना सही नहीं था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह आगे भी समाज के लिए काम करते रहेंगे, भले ही वह सरकारी सेवा में न हों।
रिंकू सिंह राही के इस्तीफे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई लोग इसे सिस्टम के भीतर की खामियों की ओर इशारा मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे व्यक्तिगत असंतोष का परिणाम बता रहे हैं। हालांकि, सरकार या प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
Published on:
31 Mar 2026 05:23 pm
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