
अखिलेश यादव ने शुरू किया 'PDA आरक्षण' ऑडिट (Image: Akhilesh 'X')
69000 Teacher Recruitment Controversy: राजधानी लखनऊ में बीते सोमवार को 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले से जुड़े अभ्यर्थियों ने बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान अभ्यर्थी चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह (Basic Education Minister Sandeep Singh) के आवास के बाहर पहुंचे थे। अब इस मामले को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Samajwadi Party President Akhilesh Yadav) ने अपने 'PDA आरक्षण' ऑडिट अभियान से जोड़ने की कोशिश की है।
UP में जारी 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के अभ्यर्थियों के विरोध-प्रदर्शन के बीच समाजवादी पार्टी ने 'PDA आरक्षण' ऑडिट अभियान शुरू किया है। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय पर अखिलेश यादव ने 'PDA ऑडिट अंक-1' बुकलेट जारी की है। सपा ने इस बुकलेट में 'PDA आरक्षण घोटाला' का मुद्दा उठाया है। इस अभियान के जरिए समाजवादी पार्टी OBC, अति पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यकों को अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्याक) संगठन के अंतर्गत एकजुट करने का प्रयास कर रही है।
बीजेपी ने अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार पर 2012 और 2017 के बीच सरकारी भर्तियों में यादव भर्ती को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। बीजेपी का आरोप है कि सपा सरकार में सरकारी भर्तियों में यादव समुदाय के सदस्यों को प्राथमिकता दी गई। अब बीजेपी के जवाब में सपा ने 'PDA आरक्षण' ऑडिट अभियान शुरू किया है। इस अभियान में सपा ने भाजपा सरकार पर आरक्षण नीतियों को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने और पिछड़े समुदायों को नौकरियों में उनका हिस्सा देने से इनकार करने का आरोप लगाया गया है।
अखिलेश यादव ने 'PDA आरक्षण' ऑडिट बुकलेट जारी करते हुए कहा- यह पुस्तिका लाखों पिछड़े, दलित, अल्पसंख्याक युवाओं को सबूतों के साथ समझाती है कि कैसे उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार आपसे, आपके बेटों, बेटियों और बहुओं से आरक्षण का संवैधानिक अधिकार छीन रही है। यह दर्शाती है कि बाबा साहब अंबेडकर के समानता के हथियार आरक्षण को किस प्रकार धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है। हमें आशा है कि आप इस पुस्तिका को अपने उन प्रियजनों के साथ साझा करेंगे, जिनका आरक्षण छिनने का खतरा है या जो पहले ही अपना आरक्षण खो चुके हैं।
सपा ने अपनी बुकलेट में दावा किया कि भाजपा की सरकारों के कार्यकाल में 22 भर्तियों में PDA समुदायों के लिए आरक्षित 11,500 से अधिक पदों से कथित तौर पर वंचित रखा गया। सपा नेता इस दस्तावेज को भाजपा के पिछड़ा-विरोधी और उच्च जाति समर्थक रवैये का सबूत बताते हैं। सपा के सूत्रों का कहना है कि आरक्षण ऑडिट उस रणनीति का अगला चरण है, जो सामाजिक न्याय की राजनीति को सीधे रोजगार, आरक्षण और प्रतिनिधित्व से जोड़ता है। सपा के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि यह पुस्तिका विशेष रूप से बीजेपी के उस आरोप का खंडन करने के लिए तैयार की गई है, जिसमे सपा सरकार पर नौकरियों में एक ही जाति को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया गया।
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Updated on:
22 May 2026 05:03 pm
Published on:
22 May 2026 04:54 pm
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