बर्थ कम्पेनियन का शासनादेश सारे जिला अस्पताल, सीएचसी और बाल महिला चिकित्सालयों में भेज दिया गया है।
लखनऊ. प्रदेश में आने वाले दिनों में गर्भवती महिला प्रसव के समय लेबर रूम में अपने किसी एक महिला रिश्तेदार को अपने साथ ले जा सकेंगी। कुछ परिस्थितियों में पति को भी लेबर रूम में जाने की अनुमति मिल सकेगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी कर यह सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य महकमे के जानकार मानते हैं कि प्रसव के दौरान किसी करीबी व्यक्ति के साथ रहने पर महिला के हार्मोन्स ठीक तरीके से निकलते हैं और यह प्रसव के लिए सकारात्मक माहौल पैदा करता है। स्वास्थ्य विभाग अब तैयारी में है कि इस व्यवस्था को अस्पतालों में लागू किया जा सके। लेबर रूम में प्रसव के समय जिस महिला या पुरुष को मौजूद रहने की अनुमति होगी, उसे बर्थ कम्पेनियन कहा जाता है। राजधानी लखनऊ के कुछ अस्पतालों में प्रायोगिक तौर पर यह व्यवस्था शुरू भी हो चुकी है।
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में मिलेगी मदद
दरअसल प्रसव के समय गर्भवती को पीड़ा और घबराहट का सामना करना पड़ता हैं, जिसकी वजह से अभी भी बहुत सी महिलाएं घर पर ही प्रसव कराना चाहती हैं, जहां उनका कोई अपना उनके साथ रहता हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुये राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने यह फैसला लिया है कि अब गर्भवती महिला अपने साथ किसी एक महिला रिश्तेदार को प्रसव कक्ष में ले जा सकेंगी। इसकी जानकारी स्वास्थ्यकर्मियों को गर्भवती महिला की पहली जांच के समय ही प्रसूता को देनी होगी। साथ ही गर्भवती महिला किसे अपने साथ ले जाना चाहती हैं, उसका नाम और नंबर प्रसूता को जांच के समय ही एएनएम के पास दर्ज करा देना होगा। बर्थ कंपेनियन यानि प्रसव के समय रहने वाले साथी को प्रसव पूर्व की सभी जाँचों में उपस्थित होना होगा और प्रसूता को भी प्रसव पूर्व जांच के लिए प्रोत्साहित करना होगा।
नार्मल प्रसव की बढ़ जाती है संभावना
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भेजे गए पत्र में ये बात कही है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2002 में ही बर्थ कम्पेनियन को मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए बहुत जरूरी माना था। इसके बाद दुनिया भर में ये पाया गया कि बर्थ कम्पेनियन की मौजूदगी गर्भवती महिला के प्रसव के समय या पश्चात उनके स्वास्थ्य में सकारात्मक मदद करती हैं, जिससे उनके हार्मोन्स सुचारु रूप से चलते हैं। इस प्रयोग से देखा गया हैं कि प्रसव का समय कम हो जाता हैं और नॉर्मल प्रसव करने की ज्यादा संभावनाएं रहती हैं।
अस्पतालों को शासनादेश जारी
लखनऊ के एसीएमओ डॉ अजय राजा ने बताया कि बर्थ कम्पेनियन का शासनादेश सारे जिला अस्पताल, सीएचसी और बाल महिला चिकित्सालयों में भेज दिया गया है। वह अपने स्तर पर मरीजों को बर्थ कम्पेनियन की सुविधा दे सकते हैं। इसके लिए ध्यान देने की बात है कि कोई भी कम्पेनियन अपने साथ लेबर रूम में इलेक्ट्रानिक डिवाइस न लेकर जाए। साथ ही फीमेल अटेंडेंट को किसी भी तरह की कोई संक्रामक बीमारी न हो। लेबर रूम में जाने के लिए सभी नियमों का पालन हो। इसके अलावा स्टाफ के काम में किसी तरह से दखल अंदाजी नहीं करनी की सलाह कम्पेनियन को दी जाएगी।
कौन हो सकता हैं बर्थ कम्पेनियन
- बर्थ कम्पेनियन एक महिला रिश्तेदार होनी चाहिए। जिन महिलाओं का पहले प्रसव हो चुका हो, उन्हें बेहतर बर्थ कम्पेनियन माना जाएगा।
- यदि प्रसव कक्ष की निजता बरकरार रहे तो प्रसूता का पति भी साथ जा सकता हैं।
- वह किसी संक्रमित रोग से ग्रसित न हो।
- उसने साफ सुथरे कपड़े पहने हो।
- उसे गर्भवती महिला के प्रसव के पूरे समय तक उपस्थित रहना होगा।
- उसके द्वारा कैमरा या मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं किया जाएगा।