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क्या फिर से सपा में जाएंगे ओपी राजभर? सीटों पर दावा ठोंकने के बाद बढ़ी खींचतान, संजय निषाद ने दी ये नसीहत

Om Prakash Rajbhar Azamgarh Atraulia : मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 2027 चुनाव के लिए अतरौलिया सीट पर दावा ठोंका, तो संजय निषाद ने दी नसीहत। क्या जहूराबाद छोड़ फिर अखिलेश यादव के साथ जाएंगे राजभर?

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क्या सपा में जा सकते हैं ओपी राजभर, PC- Patrika

उत्तर प्रदेश की सियासी गलियारों में हलचल मची हुई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा राजनीतिक ऐलान कर दिया है। अपनी परंपरागत जहूराबाद (गाजीपुर) सीट छोड़कर वे आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। साथ ही अपने बेटे के लिए बगल की दीदारगंज सीट पर भी दावा ठोक दिया है। यह कदम एनडीए के अंदर तनाव पैदा कर रहा है और सपा गठबंधन की ओर राजभर की कथित वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं।

जहूराबाद क्यों छोड़ रहे हैं राजभर?

राजभर ने अतरौलिया से चुनाव लड़ने का फैसला गाजीपुर-मऊ क्षेत्र में अंसारी परिवार के बढ़ते प्रभाव और यादव-मुस्लिम वोटों के समीकरण को देखते हुए लिया है। 2022 में वे सपा गठबंधन और अंसारी समर्थन से जहूराबाद जीते थे। अब मुख्तार अंसारी का पूरा परिवार सपा के साथ है, इसलिए राजभर को डर है कि वहां उनके पास सिर्फ राजभर वोट ही बचेंगे।

इसके अलावा सवर्ण (ठाकुर-ब्राह्मण-भूमिहार) वोटरों की नाराजगी ने जहूराबाद को उनके लिए असुरक्षित बना दिया है। अतरौलिया को वे ‘सेफ जोन’ मान रहे हैं।

सीट शेयरिंग पर एनडीए में रार

राजभर के इस ऐलान पर सबसे तेज प्रतिक्रिया निषाद पार्टी प्रमुख और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद की आई। अतरौलिया पर निषाद पार्टी का मजबूत दावा रहा है। संजय निषाद ने कहा, 'राजभर को गठबंधन की मर्यादा में रहना चाहिए। बिना चर्चा के ऐसी घोषणाएं नहीं करनी चाहिए।'

राजभर का दावा है कि उन्होंने निषाद से बात कर ली है, लेकिन निषाद ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। यह खींचतान पूर्वांचल में एनडीए की सीट शेयरिंग को लेकर आंतरिक कलह को उजागर करती है।

‘पीला गमछा’ और अखिलेश की नाराजगी

सियासी जानकारों का मानना है कि अतरौलिया सीट का दावा दरअसल, अखिलेश यादव पर दबाव बनाने की चाल है। अतरौलिया के मौजूदा विधायक संग्राम सिंह यादव अखिलेश के बेहद करीबी हैं। राजभर इस परिवार के जरिए सपा में दोबारा एंट्री का रास्ता तलाश रहे हैं।

हालांकि, अखिलेश फिलहाल राजभर से बेहद नाराज हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को साफ हिदायत दी है कि ‘पीले गमछे वालों’ को पार्टी में एंट्री न दी जाए। फिर भी अगर बीजेपी से बात नहीं बनी तो राजभर एक बार फिर सपा गठबंधन की ओर रुख कर सकते हैं।

टेम्पो ड्राइवर से मंत्री तक, कितनी बार बदला दल?

ओम प्रकाश राजभर का सफर काफी संघर्ष भरा। वाराणसी के पास फतेहपुर के रहने वाले राजभर मूल रूप से टेम्पो ड्राइवर थे। 1980-90 के दशक में राजनीति में आए।

  • 1996: बसपा से चुनाव लड़े, हारे।
  • 2002 के आसपास: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की स्थापना की (प्रतीक: पीला झंड)

पहली बार भाजपा/एनडीए में शामिल होना

2017 विधानसभा चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) को भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन किया।

भाजपा ने उन्हें 8 सीटें दीं, जिसमें सुभासपा ने 4 सीटें जीतीं (राजभर खुद जहूराबाद से जीते)। 19 मार्च 2017 को वे योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री बने (पिछड़ा वर्ग कल्याण और विकलांगजन विकास विभाग)।

2019 में गठबंधन में तनाव बढ़ा। भाजपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के सिंबल पर टिकट देने से इनकार कर दिया। उन्होंने भाजपा के खिलाफ बगावत की और कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे। 20 मई 2019 को उन्हें योगी सरकार से बर्खास्त कर दिया गया।

16 जुलाई 2023 को ओम प्रकाश राजभर ने अमित शाह से मुलाकात के बाद अपनी पार्टी सुभासपा को फिर से भाजपा-नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल कर लिया। यह वापसी 2024 लोकसभा चुनाव से पहले हुई थी। बाद में 5 मार्च 2024 को उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार में फिर से मंत्री बनाया गया।