
लखनऊ. अयोध्या मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह (Kalyan Singh) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वर्ष 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाये जाने के मामले में उन पर मुकदमा चल सकता है। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया था, जिनमें से तीन का निधन हो चुका है। शीर्ष अदालत ने उस फैसले में कल्याण सिंह को राहत दी थी। कोर्ट का कहना था कि वह राज्यपाल (राजस्थान) के संवैधानिक पर हैं। चूंकि, सोमवार को कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल पद से रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि अब उन पर भी विवादित ढांचा गिराये जाने का मामला चलेगा।
पूर्व जस्टिस सीबी पांडेय का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 365 में यह व्यवस्था है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल के खिलाफ आपराधिक कृत्य का कोई मुकदमा नहीं चलेगा। अब जब वह राज्यपाल नहीं रहेंगे तो उन पर मुकदमा चलने में कानूनी तौर पर कोई बाधा नहीं है। वहीं, हाईकोर्ट के सीनियर वकील चंद्रचूड़ पांडेय कहते हैं कि अयोध्या में विवादित ढांचा गिराये जाने के मामले में कल्याण सिंह के संवैधानिक पद से हटने के बाद मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नोटिस देने के उपरांत ही ऐसा किया जा सकेगा। उनका कहना है कि कल्याण सिंह के राज्यपाल रहने के दौरान भी नोटिस देकर उन पर मुकदमा चलाया जा सकता था।
1992 में ढहाया गया था विवादित ढांचा
6 दिसंबर 1992 में हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर विवादित ढांचा ढहा दिया था। इसके बाद देश भर में सांप्रदायिक दंगे हुए। मामले में सीबीआई ने कोर्ट से लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित 13 नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलने की मांग की थी। मामले की सुनवाई करते हुए हुए न्यायाधीश नरीमन ने कहा था कि इस मामले के कई आरोपी पहले ही मर चुके हैं। और देरी हुई तो कुछ और कम हो जाएंगे।
इन पर चल रहा है मुकदमा
लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, सतीश प्रधान, चंपतराय बंसल, साध्वी ऋतंभरा, राम विलास वेदांती, पूर्व विधायक जगदीश मुनि महाराज, बीएल शर्मा प्रेम, नृत्य गोपाल दास, धर्मदास और विष्णु हरि डालमिया।
इनके भी थे नाम (अब दुनिया में नहीं रहे)
बाल ठाकरे, आचार्य गिरिराज किशोर, अशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ, परमहंस रामचंद्र दास, सतीश नागर, कानपुर, मोरेश्वर सावे।