लखनऊ

केंद्र सरकार की इस संस्था के तहत केजीएमयू में गरीब मूक बधिर बच्चों को मुफ्त में लगेगा कॉक्लियर इम्प्लांट

ईएनटी विभाग की ओर से गरीब बच्चों को मुफ्त में कॉक्लियर इम्प्लांट लगाया जाएगा
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Aug 18, 2018
cochlear implant
केंद्र सरकार की इस संस्था के तहत केजीएमयू में गरीब मूक बधिर बच्चों को मुफ्त में लगेगा कॉक्लियर इम्प्लांट

लखनऊ. केंद्र सरकार की अली यावर जंग राष्ट्रीय विकलांग संस्थान और उप्र सरकार के बीच गरीब बच्चों को कॉक्लियर इम्प्लांट की सुविधा देने के लिए एमओयू साइन किया है। केजीएमयू का ईएनटी विभाग में गरीब मूक-बधिर बच्चों को नई जिंदगी देगा। दरअसल ईएनटी विभाग की ओर से गरीब बच्चों को मुफ्त में कॉक्लियर इम्प्लांट लगाया जाएगा।

ईएनटी विभाग के हेड डॉ. अनुपम मिश्रा ने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट के जरिये गरीब मूक बधिर बच्चों की जिंदगी संवारने का काम किया जा रहा है। इस इम्प्लांट की कीमत 6 से 8 लाख के करीब होती है, जो कि गरीब परिवार के लोग अफोर्ड नहीं कर पाते। ऐसे में कई बच्चे पैसों की कमी के कारण इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाते। इसलिए केंद्र सरकार की अली यावर जंग संस्था ऐसे बच्चों को फ्री में इम्प्लांट मुहैया कराती है। इसमें तमाम तरीके के क्राइटेरिया तय किए जाते हैं जिससे कि योजना का लाभ गरीब बच्चों को मिल सके।

इन संस्थानों के साथ साइन हुए एमओयू

राज्य सरकार ने 12 चिकित्सा संस्थानों के साथ एमओयू साइन किया है। इनमें प्रमुख रूप से केजीएमयू, बनारस का बीएचयू और कानपुर का जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज शामिल है।

क्या है कॉक्लियर इम्प्लांट

जन्म से गूंगे-बहरे बच्चों को फायदा देने वाला कॉक्लियर ऐसे मेडिकल इन्वेंशन है, जिसमें सुनने वाली इंद्रियों में विद्युतीय उत्तेजना पैदा की जाती है। कॉक्लियर इम्प्लांट दो तरह का होता है। एक व जिसमें बच्चे के सिर पर करीब एक इंच का ट्रांसमीटर होता है और दूसरा व जिसमें कान के ऊपर माइक्रोफोन और उससे जुड़ा एक इलेक्ट्रोड कान के अंदर नर्व तक लगाया जाता है। ये पूरा बैटरी ऑपरेटेड डिवाइस है, जिसे एक बार चार्च करो तो 4 से 5 दिन तक चलता है।

इम्प्लांट के बाद स्पीच थैरेपी

कॉक्लियर इम्प्लांट के बाद ताली बजा कर या आवाज लगायी जाती है, जो कि तब नर्व सिस्टम तक पहुंचती है। इसके बाद आवाज सुन बच्चा उस पर हरकत करने लगता है। लेकिन बच्चा हर आवाज पर हरकत करे इसके लिए स्पीच थैरेपी करवानी पड़ती है। इसके बाद बच्चा बोलना और सुनना सीख पाता है। हालांकि उसे सामान्य बच्चों की तरह बोलने में करीब एक साल का समय लगता है।

क्या है अली यावर जंग राष्ट्रीय श्रवण विकलांग संस्थान

इस संस्थान की स्थापना 9 अगस्त 1983 में हुई थी। यह सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के अधीन स्वायत्त संगठन है। संस्थान का मुख्य उद्देश्य मूक-बधिर बच्चों को चिकित्सा से लेकर हर क्षेत्र में सुविधाएं देना है। इसका मुख्यालय बांद्रा, मुंबई में है।

Published on:
18 Aug 2018 01:21 pm