किराए पर कर कटौती का दावा करना मुश्किल हो सकता है लेकिन अगर इसका नियम जान लें, तो अपनी वर्षों की कमाई को बचा सकते हैं। रेंटल इनकम पर धारा 24 के तहत आयकर का भुगतान करना होता है।
Rental Income Tax: किराए की संपत्ति से होने वाली आय पर भारतीय आयकर अधिनियम के तहत कर लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसी छूट है जिसके तहत आप कर योग्य किराए की आय को करदाता के रडार से बचा सकते हैं। किराए पर कर कटौती का दावा करना मुश्किल हो सकता है लेकिन अगर इसका नियम जान लें, तो अपनी वर्षों की कमाई को बचा सकते हैं। रेंटल इनकम पर धारा 24 के तहत आयकर का भुगतान करना होता है।
रेंट एग्रीमेंट में नाम होना जरूरी
लीज एग्रीमेंट या फ्लैट के लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट में आपका नाम होना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया तो आपने जो किराया चुकाया है, उस पर आप टैक्स कटौती का दावा नहीं कर सकेंगे। यह आवश्यकता इस बात पर ध्यान दिए बिना लागू होती है कि आपको अपने एम्प्लॉयर से मकान किराया भत्ता मिलता है या नहीं।
टैक्स कटौती आपके द्वारा भुगतान के अनुपात में होनी चाहिए
मान लीजिए कि एक ही जगह पर चार से पांच लोग रहते हैं, तो आप उस पैसे के अनुपात में कटौती का दावा कर सकते हैं, जिसे आपने वास्तव में किराए के रूप में चुकाया है। उदाहरण के लिए, अगर कुल किराया 40,000 रुपये है और आप 10,000 रुपये का भुगतान कर रहे हैं तो आप केवल 10,000 रुपये प्रति माह मकान किराए में कटौती का दावा कर सकते हैं।
मकान मालिक है एनआरआई, तो काट लें टीडीएस
अगर आपका मकान मालिक एनआरआई है, तो आपको टीडीएस काटना होगा। आप त्रैमासिक टीडीएस रिटर्न भी दाखिल कर सकते हैं और अपने मकान मालिक को टीडीएस प्रमाण पत्र जारी करना होगा। इसके लिए आपको मकान मालिक के पैन की जरूरत होगी।
रेंट और फूड का भुगतान अलग रखें
अगर आप पीजी में रहते हैं और किराए के लिए कटौती का दावा करना चाहते हैं, तो रेंट और फूड के भुगतान को अलग रखें। अगर आपका सालाना किराया एक लाख रुपयों से ज्यादा है, तो कटौती का दावा करने के लिए आपके पास मकान मालिक का पैन नंबर होना चाहिए। वहीं, स्त्रोत पर कर कटौती आपका एम्प्लॉयर भी पैन की मांग करेगा।