लखनऊ

High Court Order: पार्षद को शपथ न दिलाने पर हाईकोर्ट सख्त, मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज

Mayor powers seized high court: लखनऊ नगर निगम मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। पार्षद को शपथ न दिलाने पर नाराज अदालत ने मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं।
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Updated: 22 May 2026, 11:29 AM IST
लखनऊ नगर निगम में बड़ा फैसला, डीएम और नगर आयुक्त को अस्थायी जिम्मेदारी (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
लखनऊ नगर निगम में बड़ा फैसला, डीएम और नगर आयुक्त को अस्थायी जिम्मेदारी (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

High Court Order Nagar Nigam Mayor Power Break: लखनऊ में नगर निगम से जुड़े एक मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने पांच महीने से निर्वाचित पार्षद को शपथ न दिलाए जाने पर नाराजगी जताई और लखनऊ की महापौर के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं।

क्या है मामला

फैजुल्लागंज वार्ड संख्या-73 से निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को चुनाव न्यायाधिकरण ने 19 दिसंबर 2025 को विजयी घोषित किया था। इसके बावजूद उन्हें अब तक पद एवं गोपनीयता की शपथ नहीं दिलाई गई, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि को लंबे समय तक शपथ से वंचित रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न होने पर जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा।

मेयर के अधिकार सीज

अदालत ने सख्त कदम उठाते हुए लखनऊ की महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। अब नगर निगम का कार्य अस्थायी रूप से जिला मजिस्ट्रेट या नगर आयुक्त देखेंगे।

अधिकारियों को फटकार

सुनवाई के दौरान जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त अदालत में पेश हुए। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आदेश का पालन तुरंत सुनिश्चित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट का भी हवाला

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन रहा।

आगे की व्यवस्था

कोर्ट ने साफ किया है कि जब तक पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी। नगर निगम के कामकाज की जिम्मेदारी फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों के पास रहेगी।