- यूपी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, राजस्थान में भी हुई छापेमारी
लखनऊ. Riverfront scam यूपी जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव खत्म हो गए। बहुचर्चित रिवरफ्रंट घोटाले में सीबीआई ने यूपी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, राजस्थान में भी छापेमारी की है। राजधानी लखनऊ, सीतापुर, रायबरेली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर, इटावा, अलीगढ़, एटा, गोरखपुर, मुरादाबाद आगरा, कोलकाता और अलवर में एक साथ छापेमारी की। यूपी के 13 जिलों में छापे, 42 ठिकानों में तलाशी हो रही है। सीबीआई ने शुक्रवार को ही 190 लोगों पर केस दर्ज किया था।
95 फीसदी बजट खर्च पर काम तब भी अधूरा :- अखिलेश सरकार में गोमती नदी को स्वच्छ बनाने और उसके किनारों को लंदन की थेम्स नदी की तर्ज पर विकसित करने के लिए योजना शुरू की गई थी। इसके लिए राजधानी लखनऊ में रिवरफ्रंट तैयार किया गया। करीब 1513 करोड़ रुपए की इस योजना में वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिली। रिवर फ्रंट का काम करने वाली संस्थाओं ने 95 फीसदी बजट खर्च करके भी पूरा काम नहीं किया था।
सीएम योगी की सख्ती से घोटाले का हुआ पर्दाफाश :- जैसे ही सत्ता बदली तो योगी सरकार ने वर्ष 2017 में न्यायिक जांच के आदेश दिये। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में गठित समिति ने जांच में दोषी पाए गए इंजीनियरों व अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की थी। जांच में पता चला था कि पूरे प्रोजेक्ट में करीब 800 टेंडर निकाले गए थे। न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही योगी सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इस केस में 19 जून 2017 को लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में 8 के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज किया गया था।
कई आरोप हैं :- गोमती रिवर फ्रंट निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियरों पर आरोप हैं कि, उन्होंने दागी कंपनियों को काम, विदेशों से महंगा सामान, चैनलाइजेशन कार्य में घोटाला, नेताओं और अधिकारियों के विदेश दौरे में फिजूलखर्ची, वित्तीय लेन-देन में घोटाला और नक्शे के अनुसार कार्य नहीं किया है।