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594 किमी का गंगा एक्सप्रेसवे तैयार: मेरठ से प्रयागराज के बीच सफर होगा तेज, 29 अप्रैल को पीएम करेंगे लोकार्पण

Ganga Expressway: मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला 594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो चुका है। 29 अप्रैल को इसका लोकार्पण होगा, जिससे यात्रा तेज और आसान होगी तथा उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।

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लखनऊ

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Aman Pandey

Apr 25, 2026

ganga expressway 594km up project launch

594 किमी का गंगा एक्सप्रेसवे तैयार | AI Generated Image

India Expressway Development: उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला यह मेगा प्रोजेक्ट प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे, जिससे लाखों लोगों को तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा। यह परियोजना न केवल सड़क परिवहन को बेहतर बनाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से भी सशक्त करेगी।

37 हजार करोड़ की लागत से बना मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट

करीब 37 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ गंगा एक्सप्रेसवे देश के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा संचालित इस परियोजना को रणनीतिक योजना और बेहतर प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर संसाधनों के उपयोग और तकनीकी दक्षता के चलते इस प्रोजेक्ट को तय समयसीमा में पूरा किया गया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

चार पैकेज में बांटकर तेज किया गया निर्माण कार्य

इस विशाल परियोजना को चार प्रमुख पैकेज में विभाजित कर अलग-अलग एजेंसियों को सौंपा गया, जिससे निर्माण कार्य में तेजी आई। पहले पैकेज की लंबाई 129.70 किमी और लागत 9 हजार करोड़ से अधिक रही। दूसरे पैकेज की लंबाई 151.70 किमी और लागत लगभग 9 हजार करोड़ रुपये रही। तीसरे पैकेज की लंबाई 155.70 किमी और लागत भी करीब 9 हजार करोड़ रुपये निर्धारित की गई। चौथे और सबसे लंबे पैकेज की लंबाई 156.847 किमी है, जिसकी लागत लगभग 9.5 हजार करोड़ रुपये रही। इस मल्टी-पैकेज मॉडल ने परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मॉनिटरिंग और समन्वय से तय समय पर पूरा हुआ प्रोजेक्ट

गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना की सफलता के पीछे नियमित समीक्षा, तकनीकी समन्वय और ग्राउंड लेवल पर कड़ी निगरानी की बड़ी भूमिका रही। प्रत्येक पैकेज पर अलग-अलग टीमें लगातार काम करती रहीं, जिससे कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रही। इसी वजह से इतने बड़े प्रोजेक्ट को समयसीमा के भीतर पूरा करना संभव हो पाया, जो भविष्य की परियोजनाओं के लिए भी एक मिसाल बनेगा।

एक्सप्रेसवे नहीं, बनेगा आर्थिक विकास का कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि इसे एक बड़े आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ जुड़े इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देंगे। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच दूरी को कम करते हुए यात्रा समय में भारी कमी लाएगा। साथ ही, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा।