सपा और सुभासपा का गठबंधन टूटने के बाद से ही अखिलेश यादव की नजर राजभर वोटरों पर है। इसी वजह से अखिलेश यादव ओपी राजभर की पार्टी सुभासपा से अलग होकर बनी सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी को बढ़ावा देने में लग गए हैं।
समाजवादी पार्टी ने राजभर वोटों को साधने की रणनीति तैयार की है। ओम प्रकाश राजभर के अलग होने के बाद से ही उनके वोट बैंक पर निगाहें हैं। इस वोट बैंक को पाने के लिए अब सपा नए पैंतरे खेल रही है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ऐलान किया कि समाजवादी पार्टी गोमती तट पर महाराजा सुहेलदेव का स्मारक बनवाएगी।
दरअसल, ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से अलग होकर बनी सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी को सपा बढ़ावा देने में लगी है। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि हमारी पार्टी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक को आगे बढ़ाने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं।
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सपा ने राजभर को दिया बहुत सम्मान
उन्होंने बताया कि ओपी राजभर को सपा ने बहुत सम्मान दिया। उनको 2022 के विधानसभा में उनके हिसाब से टिकट बांटे गए हैं। लेकिन, वह सत्ता की लालच में भाजपा के साथ चले गए। भाजपा भी उन्हें इस्तेमाल कर रही है। वो मंत्री बनने के चक्कर में लगे हैं। लेकिन, पता नहीं, उन्हें कब सफलता मिलेगी।
दोनों का पार्टी का साथ लंबा चलेगा: अखिलेश
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी संघर्ष की कोख से निकली है। पार्टी के मुखिया महेन्द्र राजभर संघर्ष के दिनों के साथी हैं और घोसी उपचुनाव में उन्होंने ईमानदारी से साथ दिया। यह साथ लंबा चलेगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय के लिए जातीय जनगणना की मांग करती है।
महेन्द्र राजभर ने अखिलेश यादव पर भरोसा जताते हुए सामाजिक न्याय की लड़ाई में राजभर समाज के भी शामिल रहने का संकल्प जताया। उन्होंने कहा कि राजभर समाज के हक और सम्मान के लिए समाजवादी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ मिलकर सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।