
लखनऊ नगर निगम में बड़ा फैसला, डीएम और नगर आयुक्त को अस्थायी जिम्मेदारी (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
High Court Order Nagar Nigam Mayor Power Break: लखनऊ में नगर निगम से जुड़े एक मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने पांच महीने से निर्वाचित पार्षद को शपथ न दिलाए जाने पर नाराजगी जताई और लखनऊ की महापौर के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं।
फैजुल्लागंज वार्ड संख्या-73 से निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को चुनाव न्यायाधिकरण ने 19 दिसंबर 2025 को विजयी घोषित किया था। इसके बावजूद उन्हें अब तक पद एवं गोपनीयता की शपथ नहीं दिलाई गई, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि को लंबे समय तक शपथ से वंचित रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न होने पर जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा।
अदालत ने सख्त कदम उठाते हुए लखनऊ की महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। अब नगर निगम का कार्य अस्थायी रूप से जिला मजिस्ट्रेट या नगर आयुक्त देखेंगे।
सुनवाई के दौरान जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त अदालत में पेश हुए। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आदेश का पालन तुरंत सुनिश्चित किया जाए।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन रहा।
कोर्ट ने साफ किया है कि जब तक पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी। नगर निगम के कामकाज की जिम्मेदारी फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों के पास रहेगी।
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Updated on:
22 May 2026, 11:29 AM IST
Published on:
21 May 2026, 11:33 PM IST
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