लखनऊ में गौरव दिवस के रूप में बिरसा मुंडा की जयंती मनाई गई। इस दौरान देश के विभिन्न कोने से भारतीय आदिवासी कलाकारों इकट्ठा हुए हैं, जो सात दिनों में 30 अन्य प्रकार के संगीत और नृत्य का प्रदर्शन करेंगे।
जनजातीय भागीदारी समारोह बुधवार को संगीतीय नाटक अकादमी के रूप में शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सहित देश भर के आदिवासी कलाकारों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम हफ्ते भर तक चलेगा। इस कार्यक्रम की शुरुआत 1090 क्रॉसिंग से लेकर संगीत नाटक अकादमी तक मार्च के साथ हुई। इसमें सभी कलाकार शामिल थे, जो इस कार्यक्रम में प्रदर्शन करने के लिए देश के विभिन्न कोनों से आए थे।
भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता कार्यकर्ता बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में ‘जनजाति गौरव दिवस’ मनाया जाता है। आदिवासी कलाकारों के लगभग 20 समूह अगले सात दिनों में 30 अन्य प्रकार के संगीत और नृत्य रूपों का प्रदर्शन करने के लिए यहां इकट्ठा हुए हैं। ये कलाकार ओडिशा, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़, असम, नागालैंड सहित 17 राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रदेश के कई मंत्री उद्घाटन समारोह में हुए शामिल
उद्घाटन समारोह में राज्य के पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम और राज्य
मंत्री असीम अरुण सहित अन्य उपस्थित थे। उनमें से प्रत्येक ने इस आयोजन की तरह इन कला रूपों और प्लेटफार्मों को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया। सिंह के अनुसार, आदिवासी संस्कृतियों ने हमेशा प्राकृतिक संसाधनों और उनके आवासों की अखंडता में बहुत योगदान दिया है, और अब समय आ गया है कि राज्य सरकारें उनका उत्थान करके इसे आगे बढ़ाएं।
स्टेज- शो खुले मैदान में बनाया गया है, वहां स्थानीय हस्तशिल्प जैसे टेराकोटा, गढ़ा लोहे और बांस से बनी वस्तुएं और शोपीस बेचने वाले व्यापारिक स्टॉल भी लगे हैं। हर दिन नए नृत्य रूपों के साथ मंच पर जगमगाता यह कार्यक्रम अगले सात दिनों तक हर रात 8 बजे तक जारी रहेगा।