UP government big decision यूपी सरकार की ट्रॉलियों (trolleys) के लिए नई गाइडलाइन के तहत, अब सिर्फ कृषि कार्यों (agricultural work) के लिए ही ट्रॉलियों उपयोग होगा। और उसका पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा।
यूपी सरकार ने ट्रॉलियों के लिए नई गाइडलाइन बनेगी। गाइडलाइन में यह प्रावधान किया गया है कि, अगर कोई इस गाइडलाइन का पालन नहीं करेगा तो उसे सजा मिलेगी। यूपी सरकार की ट्रॉलियों के लिए नई गाइडलाइन के तहत, अब सिर्फ कृषि कार्यों के लिए ही ट्रॉलियों उपयोग होगा। और उसका पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। ट्रॉलियों के कॉमर्शियल इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी जाएगी। साथ ही ट्रॉलियों का इंश्योरेंस करवाना भी होगा। हां, चार पहिया ट्रॉली के डिजाइन की अनुमति लेनी होगी। ट्रैक्टर ट्रॉलियों से होने वाले हादसों को रोकने के लिए सरकार की तरफ से गठित पांच सदस्यीय समिति इन बिन्दुओं पर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी। रिपोर्ट पर शासन की मुहर लगते ही इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
यूपी में नहीं बनेंगी दो पहियों की ट्रॉली
शासन के भेजे प्रस्ताव में ट्रॉलियां व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकृत नहीं होंगी। ट्रॉली निर्माता को आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थान से डबल एक्सेल यानी चार पहियों की ट्रॉली की डिजाइन की अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही वह चार पहियों की ट्रॉली बना सकेगा। दो पहियों की ट्रॉली न बनेगी और न ही पंजीकृत की जाएंगी।
पांच सदस्यीय समिति का हुआ गठन
दरअसल, पिछले दिनों लखनऊ के इटौंजा क्षेत्र, कानपुर और लखीमपुर में हुए हादसों में कई लोगों की जान गई थी। इनमें दो पहिया ट्रॉली शामिल थी। ऐसे हादसों पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक पांच सदस्यीय समिति गठित की गई थी। यह समिति कई बिंदुओं पर मंथन करने के साथ ही पंजाब की नियमावली का भी अवलोकन कर रही है।
रिपोर्ट भेजी जाएगी, मंजूरी के बाद होगी लागू
अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) वीके सोनकिया ने बताया कि, रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए एक बैठक हो चुकी है। रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। इस पर मुहर लगते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
ट्रॉलियों के डिजाइन का अप्रूवल अनिवार्य
प्रदेश में ट्रॉलियां बनाने वाली करीब 30 कंपनियां हैं। यह एआरएआई, पुणे से डिजाइन का अप्रूवल लेती हैं। अब इन्हें आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थान से भी डिजाइन की अनुमति लेनी होगी।
लखनऊ में सिर्फ 571 ट्रॉलियां ही पंजीकृत
यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि, पूरे यूपी की राजधानी लखनऊ में सिर्फ 571 ट्रॉलियां ही आरटीओ कार्यालय में पंजीकृत हैं। इसमें 90 कृषि कार्य और 481 कॉमर्शियल श्रेणी की हैं। जबकि पंद्रह हजार से अधिक ट्रॉलियां बिना पंजीकरण ही राजधानी में दौड़ रही हैं। तो जान लीजिए पूरे यूपी में कितनी ट्रॉलियां बिना पंजीकरण ही सड़कों पर दौड़ रहीं हैं।