School New Rules: स्कूलों में अब बच्चों को पढ़ाने का तरीका बदल गया है। बच्चों के अब आधुनिक तरीके से पढ़ाने के फैसले के साथ ही कई बड़े फैसले हुए।
अब सरकारी परिषदीय स्कूलों में नौनिहाल एडवांस सिस्टम से पढ़ाई करेंगे और ब्लूटूथ से ऑडियो सुनकर उन्हें पढ़ने की सहूलियत दी जाएगी। इसके लिए प्रदेश के 30 हजार से अधिक स्कूलों में स्पीकर लगाए जाएंगे। इसकी शुरुआत उरई जिले ने कर भी दी है। प्राथमिक व कंपोजिट 1188 स्कूलों को दी गई 23 लाख की धनराशि से दो दो ब्लूटूथ स्पीकरों की खरीद भी की जा चुकी है। जिसका लाभ नौनिहालों को जुलाई से स्कूल खुलने पर मिलेगा।
सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था को सुधारने की दिशा में शासन के निर्देश पर कवायदें शुरू की जा रही हैं। इसका लाभ परिषदीय स्कूलों के बच्चों को पढ़ने में मिलेगा और हाईटेक शिक्षण व्यवस्था से वह धीरे धीरे जुड़ेंगे। नई कवायद के तहत अब एक से पांचवीं के बच्चे ब्लूटूथ स्पीकर से सुनकर पढ़ाई करेंगे। इसके लिए शिक्षक शिक्षा विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए कटेंट के साथ विषय से संबंधित उपयोगी सामग्री अपने मोबाइल, लैपटॉप के माध्यम से सुनाएंगे जिससे बच्चों में दक्षता एवं कौशल विकास बढ़ाया जा सके। राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय के निर्देश पर जनपद के बेसिक शिक्षा के प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा, कक्ष का वातावरण सुधारने व अतिरिक्त शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए ब्लूटूथ स्पीकरों की खरीद की गई है।
जिलों में खरीदे गए स्पीकर
बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रेमचन्द यादव ने बताया कि विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष समिति के अध्यक्ष व प्रधानाध्यापक सदस्य सचिव एवं दो अभिभावक एक महिला व एक पुरुष व एक वरिष्ठ शिक्षक समिति के सदस्यों की निगरानी में सभी प्राथमिक विद्यायो में ब्लूटूथ स्पीकर खरीद लिए गए हैं। क्रय सामग्री का सत्यापन जिला समन्वय प्रशिक्षण प्रशिक्षण विश्वनाथ दुबे को सौंपा गया है।
बच्चों का रोचक तरीके से होगा पठन पाठन
समन्वयक प्रशिक्षण विश्वनाथ दुबे ने बताया कि प्रति विद्यालय दो सेट ब्लूटूथ स्पीकर खरीदने को दो हजार रुपये की धनराशि स्कूलों के खातों में भेजी गई थी और सभी जगह स्पीकर क्रय भी कर लिए गए हैं। यह शासन की सराहनीय पहल है। इसके जरिए डिजिटल माध्यम पर उपलब्ध विभिन्न प्रकार की शैक्षणिक सामग्री एवं शिक्षक की ओर से विकसित उपयोगी शैक्षणिक सामग्री का भी शिक्षक ब्लूटूथ स्पीकर के माध्यम से उपयोग कर सकेंगे। बच्चों को रोचक तरीके से पढ़ाने से उनके पठन-पाठन के स्तर में अपेक्षित सुधार होगा।