
UP Startup Policy 2026: लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 'यूपी टेक्सटाइल-2026' का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में आए बड़े प्रशासनिक और आर्थिक बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी। तब निवेशक यहां व्यापार का सपना लेकर आते थे, लेकिन उन्हें अवैध वसूली की पर्चियों के साथ लौटना पड़ता था और माफिया खुलेआम घूमते थे। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बीते वर्षों में राज्य में कानून का शासन स्थापित कर लोगों का विश्वास बहाल किया गया है। आज सुरक्षित माहौल के कारण आम नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों का भरोसा सरकार पर मजबूत हुआ है, जिससे यूपी निवेश का नया केंद्र बन रहा है।
उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त उछाल लिया है। 2017 से पहले जहां प्रदेश में महज 120 स्टार्टअप थे, वहीं अब यह संख्या 24 हजार से अधिक हो गई है। इनमें आठ यूनिकॉर्न भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में यूपी स्टार्टअप पॉलिसी-2026 और स्टार्टअप मिशन पोर्टल का शुभारंभ करते हुए युवा उद्यमियों को नई उम्मीद दी है।
पैसे का सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। नई पॉलिसी में एक हजार करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स बनाया गया है। यह राशि एसआईडीबीआई के माध्यम से डॉटर फंड्स में निवेश होगी। स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप ग्रांट अब 10 लाख रुपये तक मिलेगी, जबकि सीड फंडिंग 15 लाख रुपये तक बढ़ा दी गई है। विशेष मामलों में यह 50 लाख रुपये तक जा सकती है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के स्टार्टअप्स को और ज्यादा मदद दी जाएगी। इन्हें प्रोटोटाइप के लिए 20 लाख और सीड फंडिंग के लिए 30 लाख रुपये तक का सहयोग मिलेगा। पेशेंट कैपिटल के रूप में 100 करोड़ रुपये तक की लंबी अवधि वाली पूंजी भी उपलब्ध होगी। मैचिंग ग्रांट 5 करोड़ रुपये तक और आरएंडडी पर 40 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है।
शुरुआती चरण में उद्यमियों को दो साल तक हर महीने 20 हजार रुपये की सस्टेनेंस अलाउंस मिलेगी। पेटेंट और क्वालिटी सर्टिफिकेशन पर 2 करोड़ रुपये तक का रिइम्बर्समेंट, टर्म लोन पर 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी और ईपीएफ-ईएसआई योगदान का रिफंड भी शामिल है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड के स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सरकारी मदद के अलावा निजी वेंचर कैपिटल और एंजेल इन्वेस्टर्स भी सक्रिय हो रहे हैं। नोएडा और लखनऊ में सबसे ज्यादा फंडेड स्टार्टअप हैं। प्रदेश में 88 से अधिक डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त इंक्यूबेटर काम कर रहे हैं। हाल ही में 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ और नौ इंक्यूबेटरों को 1.79 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई।
सफलता की दर चुनौतीपूर्ण है। देशभर में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से हजारों बंद हो चुके हैं। यूपी में भी कई शुरुआती स्टार्टअप बाजार की मांग, फंडिंग की कमी या बिजनेस मॉडल की कमजोरी के कारण बंद हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार औसत सफलता दर करीब 20 प्रतिशत के आसपास रहती है। फिर भी यूनिकॉर्न की मौजूदगी और बढ़ते निवेश से संकेत मिलता है कि मजबूत मॉडल वाले स्टार्टअप टिक रहे हैं और विस्तार कर रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि यूपी देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में अपनी आबादी के अनुपात में योगदान दे। 20 नए सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, यू-हब और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। अगर फंडिंग का सही इस्तेमाल हो और उद्यमिता का माहौल बना रहे तो यूपी स्टार्टअप हब के रूप में और मजबूत होगा। युवाओं के सपनों को पंख लगाने का यह मौका निर्णायक साबित हो सकता है।