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UNSC की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत का चुनावी अभियान तेज; इस बार चुनौती बनेगा ताजिकिस्तान, 70 के दशक में पाकिस्तान से हारा भारत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अस्थाई सदस्यता के लिए भारत ने चुनावी अभियान शुरू कर दिया है। UNSC की सदस्यता भारत के लिए क्यों जरूरी है? यह संगठन कैसे कार्य करता है और इसमें कितने स्थाई सदस्य हैं? UNSC की ताकत, कार्य और इससे जुड़े अहम सवालों के जवाब के लिए पूरी खबर पढ़िए…
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Jul 17, 2026
India launches election campaign for temporary seat in UNSC
UNSC में अस्थाई सदस्यता के लिए भारत ने चुनावी अभियान शुरू किया (फोटो सोर्स- पत्रिका)

United Nations Security Council: भारत ने विश्व के सबसे शक्तिशाली मंच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता पाने का अभियान तेज कर दिया है। इस बाबत विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत के अभियान का नारा शांति (सिक्योरिंग होलिस्टिक एडवांसमेंट थ्रू नॉर्म्स ट्रस्ट इंटीग्रिटी) लॉन्च किया। भारत का लक्ष्य जून 2027 में चुनाव जीतकर 2028-29 के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बनना है।

विदेश मंत्री ने न्यूयार्क से लॉन्च किया चुनावी अभियान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 13 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता हासिल करने के अभियान की औपचारिक शुरुआत की। भारत, एशिया-प्रशांत समूह की एक सीट के लिए चुनावी मैदान में है। भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा। UNSC में की सदस्यता पाने के लिए चुनावी अभियान की शुरुआत के समय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अगर भारत सुरक्षा परिषद का सदस्य चुना जाता है तो उसकी 6 प्राथमिकताएं होंगी। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस चुनावी अभियान की जानकारी शेयर की है।

6 सिद्धांतों पर आधारित होगी भारत की रणनीति

भारत की पहली प्राथमिकता : विदेश मंत्री जयशंकर ने UNSC में अस्थाई सदस्य चुने जाने के बाद सोशल मीडिया पर 6 प्राथमिकताएं बताई हैं। पहली प्राथमिकता में वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाना और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर उनकी चिंताओं को ध्यान में रखना है। इसके अलावा वैश्विक दक्षिण को हमारे साझा भविष्य के निर्धारण में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

दूसरी प्राथमिकता : लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिपूर्ण और प्रभावी बहुपक्षवाद को बढ़ावा देना। भारत का दृष्टिकोण संवाद, सहयोग और मतभेदों को दूर करने पर आधारित होगा।

तीसरी प्राथमिकता : भविष्य के लिए तैयार शांतिरक्षा प्रणाली, जो बेहतर सुसज्जित, तकनीकी रूप से सक्षम, व्यावहारिक रूप से निर्धारित और मुख्य उद्देश्यों पर केंद्रित हो। महिला, शांति एवं सुरक्षा एजेंडा से प्रेरित होकर, महिला शांतिरक्षकों की भूमिका का हमेशा समर्थन करना।

चौथी प्राथमिकता : समावेशिता, सुरक्षा और जनहित पर आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मानव-केंद्रित दृष्टिकोण। हम इसके दुरुपयोग और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरों का मुकाबला करने के लिए भी दृढ़ संकल्पित हैं।

पांचवी प्राथमिकता : अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सीमा समझौते (UNCLOS) के अनुसार एक स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देना। समुद्री व्यापार के सुरक्षित और निर्बाध प्रवाह को बनाए रखना, समुद्री डकैती से लड़ना, नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपदा जोखिम निवारण (HADR) मिशनों को बढ़ावा देना।

छठी प्राथमिकता : प्रभावी और निरंतर प्रयासों के माध्यम से आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करना। आतंकवादी समूहों को सूचीबद्ध करने के लिए वस्तुनिष्ठ और साक्ष्य-आधारित प्रस्तावों के साथ एक पारदर्शी प्रतिबंध व्यवस्था समय की आवश्यकता है।

भारत और ताजिकिस्तान का मुकाबला

भारत ने सुरक्षा परिषद चुनाव से करीब 1 साल पहले ही अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी है। एशिया-प्रशांत समूह के हिस्से में 2028-29 के लिए केवल एक अस्थायी सीट है, जिसके लिए भारत और ताजिकिस्तान आमने-सामने होंगे। हाल के वर्षों में चुनावों में बड़े देशों की भी हार हुई है।

जर्मनी जैसे प्रभावशाली देश का हालिया चुनाव में पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया से हारना इसका उदाहरण है। भारत को अमरीका, ऑस्ट्रिया, फिजी और श्रीलंका जैसे कई देशों का समर्थन मिल चुका है। भारत UNSC में अब तक 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है। बता दें कि UNSC के 10 अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल 2 वर्ष का होता है।

भारत ने की 80 साल पुरानी व्यवस्था बदलने की मांग

भारत ने UNSC के विस्तार की मांग दोहराई है। UN में भारत के स्थायी दूत पार्वथानेनी हरीश के मुताबिक, 80 साल पुरानी सुरक्षा परिषद की संरचना आज की चुनौतियों के अनुरूप नहीं है। जनता की यूएन के बारे में धारणा बदल गई है। इसका मुख्य कारण विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों से है।

UNSC में भारत का सहयोग

भारत ने अपनी दावेदारी के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में अपने योगदान का भी उल्लेख किया है। भारत अब तक करीब 3 लाख सैनिकों को लगभग 50 शांति मिशनों में भेज चुका है, जो दुनिया के सबसे बड़े योगदानों में से एक है। वर्तमान में भी भारत के 4,300 से अधिक सैनिक 10 सक्रिय शांति अभियानों में तैनात हैं।

भारत की स्थाई सदस्यता में कांटा बन सकता है चीन

भारत UNSC का स्थायी सदस्य बनना चाहता है, लेकिन यह राह कठिन है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना होगा। किसी भी संशोधन को पहले 193 सदस्य देशों में से कम से कम दो-तिहाई यानी 129 देशों का समर्थन चाहिए। UNSC के 5 स्थायी सदस्यों को भी इसे मंजूरी देनी होगी। यदि इनमें से एक भी देश मंजूरी नहीं देता तो संशोधन लागू नहीं हो सकता। इसमें चीन अड़ंगा लगा सकता है।

70 के दशक में पाकिस्तान की कूटनीति से हार गया भारत

भारत को 70 के दशक में पाकिस्तानी कूटनीति के आगे हार माननी पड़ी थी। उस दौर में दिसंबर 1971 की जीत के बाद भारत, दक्षिण एशिया का बड़ा खिलाड़ी बन चुका थ। बांग्लादेश का बनना, पाकिस्तान की सेना की शर्मनाक हार और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आवाज ने नई उम्मीद जगा दी थी कि अब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी कम से कम प्रभावी अस्थायी स्थान बना लेगा, लेकिन रिजल्ट पूर्वानुमान के अनुसार नहीं आया।

साल 1975 में, जब UN जनरल असेंबली ने 1976-77 के लिए नॉन-परमानेंट सदस्य चुनने की प्रक्रिया शुरू की तो एशियाई ग्रुप की एक सीट पर फिर भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी टक्कर हो गई।पाकिस्तान ने उस वक्त ये सीट हासिल कर ली और यह घटना आज भी भारत की कूटनीतिक यादों में एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में दर्ज हो गई। अब भारत 2028-29 के लिए UNSC नॉन-परमानेंट सदस्यता और उसके साथ आने वाली अस्थायी प्रेसिडेंसी के लिए कैंपेन चला रहा है, तो भारत की ये चूक भूलाई नहीं जा सकती है।

क्या थे 1975 के हालात?

1971 की जंग के बाद पाकिस्तान टूटा हुआ और अपमानित महसूस कर रहा था। उसके पास परमाणु कार्यक्रम की दिशा में तेजी आई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समर्थन सीमित था। वहीं भारत, इंदिरा गांधी के नेतृत्व में नॉन अलाइड मूवमेंट (NAM) में सक्रिय था और विकासशील देशों का चैंपियन बनने की कोशिश कर रहा था। UNSC में अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव हर 2 साल में होते हैं।

एशिया-पैसिफिक ग्रुप को आमतौर पर दो सीटें मिलती हैं, जिनमें से एक अरब या मुस्लिम देशों और दूसरी अन्य एशियाई देशों के बीच घूमती रहती है। 1975 में, मौजूदा सदस्यों में इराक का कार्यकाल खत्म हो रहा था। जनरल असेंबली के 30वें सत्र में 20-23 अक्टूबर को मतदान हुआ। अन्य क्षेत्रों की सीटें (अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप) पहले ही तय हो चुकी थीं। बेनिन, लीबिया, पनामा और रोमानिया आसानी से चुने गए। अब बची हुई एशियाई सीट पर भारत और पाकिस्तान मुख्य दावेदार थे। फिलीपींस ने भी शुरुआत में दावा किया लेकिन बाद में पीछे हट गया था।

UNSC के 5 स्थाई सदस्यों के पास है वीटो पावर

UNSC में स्थाई संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), यूनाइटेड किंगडम (UK), फ्रांस (France), रूस (Russia) और चीन (China) हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इन पांच सदस्यों को P5 भी कहा जाता है। इन पांचों देशों को वीटो पावर प्राप्त है। वीको पावर का मतलब है कि ये देश किसी भी प्रस्ताव को अकेले ही रोक सकते हैं। ये सभी द्वितीय विश्व युद्ध के विजेता देश हैं और 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय से ही स्थायी सदस्य हैं। इसके अलावा UNSC में 10 अस्थायी सदस्य भी होते हैं, जिन्हें महासभा द्वारा दो-दो साल के लिए चुना जाता है। अस्थाई देशों के पास वीटो पावर नहीं होती है। भारत लंबे समय से स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रमुख कार्य

अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना : यह UNSC का सबसे प्राथमिक और मूल कार्य है, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत इसे विशेष अधिकार प्राप्त हैं।
विवादों का शांतिपूर्ण समाधान : देशों के बीच विवादों की जांच करना और उन्हें बातचीत, मध्यस्थता या न्यायिक निपटान जैसे शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाने की सिफारिश करना।
प्रतिबंध लगाना : शांति भंग करने वाले देशों या समूहों पर आर्थिक प्रतिबंध, हथियार प्रतिबंध, यात्रा प्रतिबंध जैसे उपाय लागू करना।
सैन्य कार्रवाई को अधिकृत करना : जब शांतिपूर्ण उपाय पर्याप्त न हों, तो सामूहिक सैन्य कार्रवाई को मंज़ूरी देना।
शांति स्थापना अभियान (Peacekeeping) भेजना : संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांतिरक्षक सेना और पर्यवेक्षक मिशन तैनात करना।
नए सदस्यों की सिफारिश : नए देशों को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता देने और महासचिव की नियुक्ति के लिए महासभा को सिफारिश करना।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) से संबंधित कार्य : ICJ के न्यायाधीशों के चुनाव में महासभा के साथ मिलकर भाग लेना और ICJ के फैसलों को लागू कराने में मदद करना।
आतंकवाद-रोधी उपाय : आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक, आतंकी संगठनों को सूचीबद्ध करने जैसे प्रतिबंध व्यवस्था लागू करना (जैसा आपके पहले प्रश्न में भी उल्लेख था)।
मानवीय हस्तक्षेप (HADR) : प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों में राहत कार्यों को समन्वित करना।

Updated on:
17 Jul 2026 05:27 pm
Published on:
17 Jul 2026 05:27 pm