
इजरायल की प्रमुख रक्षा कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स (Rafael Advanced Defense Systems) भारत में आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली (Iron Dome Air Defense System) की इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्थानीय उत्पादन शुरू करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। कंपनी भारतीय रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। यदि भारतीय रक्षा क्षेत्र की कंपनियों से समझौता होता है तो भारत आयरन डोम इंटरसेप्टर मिसाइलों का एक प्रमुख उत्पादन केंद्र बन सकता है।
इजरायल न सिर्फ भारत की जरूरतें पूरी करना चाहता है, बल्कि यहां से वैश्विक निर्यात की संभावनाएं भी तलाश रहा है। फिलहाल, भारत आयरन डोम इंटरसेप्टर मिसाइलों की मिसाइलें उत्तरी इजरायल के कारखाने में बनाई जाती हैं। पिछले साल राफेल ने अमेरिका में भी इसी तरह की उत्पादन यूनिट स्थापित की थी।
इजरायली रक्षा कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स, भारत में आयरन डोम इंटरसेप्टर मिसाइलों की उत्पादन यूनिट लगाने के जरिए कई रणनीतिक और व्यावसायिक लक्ष्य हासिल करना चाहती है। भारत में यूनिट स्थापित करने से राफेल का सबसे बड़ा फायदा उत्पादन लागत में कमी का होगा। इसके साथ ही, राफेल को वैश्विक मांग पूरी करने के लिए अतिरिक्त क्षमता मिलेगी और जरूरत पड़ने पर इजरायल को बैकअप सप्लाई भी उपलब्ध हो सकेगी।
वैश्विक स्तर पर एयर डिफेंस सिस्टम की मांग तेजी से बढ़ रही है। यूक्रेन-रूस, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और अन्य भू-राजनीतिक तनावों ने कम दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों की अहमियत बढ़ा दी है। भारत में स्थानीय उत्पादन से राफेल कई देशों के इजरायल-विरोधी भावनाओं या आपूर्ति शृंखला संबंधी चिंताओं से भी बच सकेगी। भारत पहले से ही इजरायली वायु रक्षा प्रणालियों का उपयोग कर रहा है।
इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर विकसित बराक-8 मिसाइल सिस्टम भारतीय वायुसेना, नौसेना और थलसेना में शामिल है। अब आयरन डोम इंटरसेप्टर के स्थानीय उत्पादन से रक्षा क्षेत्र में सहयोग मजबूत होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल की रणनीतिक गहराई सीमित होने के कारण वह मित्र देशों के साथ उत्पादन साझेदारी बढ़ा रहा है। भारत के लिए इजरायली रक्षा कंपनी का यद कदम तकनीकी हस्तांतरण, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
इजरायली रक्षा कंपनी राफेल का आयरन डोम विश्व प्रसिद्ध शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है। यह 4 से 70 किलोमीटर की दूरी से आने वाले रॉकेट, आर्टिलरी शैल और मोर्टार हमलों को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है। यह ऑल वेदर सिस्टम है, जो दिन-रात किसी भी मौसम में काम करता है। आयरन डोम सिस्टम मुख्य रूप से 3 चरणों में काम करता है।
पहले चरण में डिटेक्शन और ट्रैकिंग, दूसरे चरण में कमांड एंड कंट्रोल, तथा तीसरे चरण में मिसाइल लॉन्चिंग शामिल है। इसमें उन्नत रडार और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है, जो खतरे की पहचान कर उसे प्राथमिकता के आधार पर नष्ट कर देता है। आयरन डोम अब तक 10,000 से अधिक सफल इंटरसेप्शन कर चुका है और इसकी सफलता दर 90 प्रतिशत से ज्यादा बताई जाती है।
हाल ही में ईरान के साथ हुए संघर्ष के दौरान आयरन डोम ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स के हमलों को प्रभावी ढंग से रोका। इस सफलता ने दुनिया भर में आयरन डोम सिस्टम की मांग बढ़ा दी है। भारत में इसका स्थानीय उत्पादन न सिर्फ सीमा सुरक्षा, बल्कि बड़े शहरों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
भारत सरकार लंबे समय से विदेशी रक्षा कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्थानीय उत्पादन और निर्यात के लिए प्रोत्साहित कर रही है। राफेल के प्रस्तावित प्लांट से इस विजन को मजबूत बढ़ावा मिलेगा। भारतीय कंपनियां तकनीकी ज्ञान हासिल करेंगी, जिससे स्वदेशी रक्षा उद्योग और मजबूत होगा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत की प्राथमिकता है।
आयरन डोम जैसी उन्नत प्रणाली के उत्पादन से न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला का हिस्सा भी बन सकता है। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और रक्षा निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-इजरायल रक्षा सहयोग पिछले कई वर्षों से मजबूत रहा है। बराक-8 के बाद आयरन डोम का स्थानीय उत्पादन इस साझेदारी को नई ऊंचाई देगा।
इजरायली रक्षा कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा भारत में आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली की इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्थानीय उत्पादन शुरू होने से दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध अच्छे होंगे। भारत-इजरायल के बीच यह समझौता न सिर्फ सैन्य क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी गहराई प्रदान करेगा।
राफेल की भारत में आयरन डोम इंटरसेप्टर उत्पादन की योजना दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इजरायल को उत्पादन विविधीकरण और लागत बचत मिलेगी तो भारत को उन्नत तकनीक, आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षमता वृद्धि का मौका मिलेगा। यदि राफेल की भारत में यूनिट स्थापित करने की वार्ता सफल रही तो यह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की एक बड़ी सफलता होगी। वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में मजबूत वायु रक्षा प्रणालियां हर देश की प्राथमिकता बन गई हैं। भारत इस दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।