
"अगर हिमालय बचेगा, तो भारत बचेगा।" यह बात लद्दाख में आंदोलन के समय कहा था और फिर वो दिल्ली में कहते हैं, "मैं किसी सरकार के खिलाफ नहीं, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के पक्ष में खड़ा हूं।"
सोनम वांगचुक की ये बातें सिर्फ-सिर्फ राष्ट्रनिर्माण और देश बचाने की मंशा को साफ करती हैं।
दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और NTA को भंग करके राष्ट्रीय परीक्षण आयोग का गठन की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम को दिल्ली पुलिस जबरन शनिवार को उठा ले गई। इसके पीछे पुलिस ने उनके बिगड़ते स्वास्थ्य और दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला बताया।
आइए, लद्दाख के इंजीनियर, शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले दो वर्षों में तीन बड़ी भूख हड़ताल किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी तीन में से दो भूख हड़तालें दिल्ली में हुईं, जबकि पहली हड़ताल उन्होंने माइनस तापमान वाले लेह में की थी।
इन तीनों आंदोलनों में मुद्दे अलग-अलग रहे, लेकिन एक बात समान रही - अपने उद्देश्य से पीछे न हटने का उनका संकल्प।
📍 स्थान: लेह
📅 शुरुआत: 6 मार्च 2024
⏳ अवधि: 21 दिन
यह सिर्फ भूख हड़ताल नहीं थी, बल्कि प्रकृति और लद्दाख की पहचान बचाने की मुहिम थी। सोनम वांगचुक ने माइनस 15 डिग्री सेल्सियस के तापमान में 'क्लाइमेट फास्ट' शुरू किया। उनकी प्रमुख मांगें थीं-
📍 स्थान: लद्दाख भवन, दिल्ली
📅 शुरुआत: 7 अक्टूबर 2024
⏳ अवधि: 16 दिन
पहले आंदोलन के बाद भी जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो वांगचुक ने संघर्ष को दिल्ली तक ले जाने का फैसला किया।
उन्होंने 120 से अधिक साथियों के साथ 'दिल्ली चलो पदयात्रा' शुरू की। 30 सितंबर को दिल्ली सीमा पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। गांधी जयंती (2 अक्टूबर) पर रिहाई के बाद उन्होंने 7 अक्टूबर से लद्दाख भवन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
इस दौरान लगभग 25 लोग उनके साथ उपवास पर बैठे। उनकी मांग वही रही—
📍 स्थान: जंतर-मंतर, दिल्ली
📅 शुरुआत: 28 जून 2026
⏳ अवधि: 20 दिन
यह पहली बार था जब वांगचुक का अनशन लद्दाख से आगे बढ़कर राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर केंद्रित था। उन्होंने NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की मांग को समर्थन देते हुए आमरण अनशन शुरू किया।
जैसे-जैसे भूख हड़ताल के दिन बढ़े…
इसके बावजूद उन्होंने समर्थकों से 20 जुलाई 2026 के संसद मार्च में शामिल होने की अपील की।
18 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पहुंची और गंभीर हालत में मौजूद सोनम वांगचुक को जंतर - मंतर धरना स्थल पर से जबरन चादर में लपेटकर एंबुलेंस से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
यहीं पर उनकी तीसरी भूख हड़ताल समाप्त हुई। खास बात यह रही कि उन्होंने स्वयं अनशन नहीं तोड़ा, बल्कि पुलिस कार्रवाई के बाद इसे रोकना पड़ा।