Patrika+

Sonam Wangchuk Health : सोनम वांगचुक का ब्लड शुगर और पोटैशियम लेवल गिरा, इनकी कमी से शरीर को क्या हो सकता है नुकसान?

Sonam Wangchuk Health News: सोनम वांगचुक के लंबे आमरण अनशन का असर अब उनकी सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। सफदरजंग के डॉक्टर उन्हें ओआरएस और पोटैशियम सप्लीमेंट दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ब्लड शुगर और पोटैशियम की कमी शरीर के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है और लंबे समय तक उपवास करने पर शरीर पर क्या असर पड़ता है? विस्तार से समझिए।
5 min read
Jul 21, 2026
Sonam Wangchuk Sonam Wangchuk Health Update
सोनम वांगचुक (Photo : IANS)

Sonam Wangchuk Health Update: सामाजिक, पर्यावरण कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे थे। उनका अनशन नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तथा इस प्रकरण से जुड़े 18 विद्यार्थियों की कथित आत्महत्या के मुद्दे पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर था। 18 जुलाई 2026 को, आमरण अनशन के 21वें दिन, दिल्ली पुलिस ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया।

सीरम पोटैशियम गिरा, ग्लूकोज और फ्लूइड लेने से इनकार

सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी ताजा हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, उनका ब्लड शुगर निचले स्तर तक पहुंच चुका है और सीरम पोटैशियम 2.9 mEq/L तक गिर गया है। अस्पताल ने यह भी बताया कि उन्होंने चिकित्सकीय सलाह के बावजूद ग्लूकोज और इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड लेने से इनकार कर दिया है।

21 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजे जारी सफदरजंग अस्पताल की ताज़ा मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, सोनम वांगचुक के जीवन रक्षक संकेतक (vital parameter) फिलहाल स्थिर हैं। हालांकि, वे अभी भी हल्के से मध्यम स्तर के निर्जलीकरण (Mild to moderate dehydration) और लगातार बनी हुई पैनसाइटोपेनिया (Pancytopenia) से जूझ रहे हैं। पैनसाइटोपेनिया ऐसी स्थिति है, जिसमें रक्त की तीनों प्रमुख कोशिकाओं- लाल रक्त कणिकाएं (एनीमिया), श्वेत रक्त कणिकाएं (ल्यूकोसाइट्स) और प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य से कम हो जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने के लिए ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) और पोटैशियम सप्लीमेंट मुंह के जरिए दिए जा रहे हैं। हालांकि, चिकित्सकों की सलाह के बावजूद उन्होंने अब भी इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड्स और ग्लूकोज लेने से इनकार कर रखा है।

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड शुगर और पोटैशियम दोनों शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक तत्व हैं। इनमें कमी होने पर शुरुआत में कमजोरी और चक्कर जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो यह हृदय, मस्तिष्क, किडनी और मांसपेशियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

ब्लड शुगर क्यों जरूरी है?

ब्लड शुगर यानी रक्त में मौजूद ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं का प्रमुख ऊर्जा स्रोत है। विशेष रूप से मस्तिष्क लगभग पूरी तरह ग्लूकोज पर निर्भर रहता है। खाली पेट में शरीर का ग्लूकोज लेवल 70–99 mg/dL तक सामान्य माना जाता है। यह अगर 70 mg/dL से नीचे चला जाए तो ऐसी स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहा जाता है। वांगचुक का 78 mg/dL इस सीमा के भीतर, पर निचले छोर पर है।

ब्लड शुगर कम होने पर क्या होता है?

शरीर में ब्लड शुगर का लेवल कम होने पर इसके शरूआती लक्षणों में अत्यधिक भूख लगना, कमजोरी महसूस होना, हाथ कांपना, पसीना आना, चक्कर आना, धड़कन तेज होना और बेचैनी शामिल है। लेकिन यदि ब्लड शुगर और गिर जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। शुगर लेवल ज्यादा गिर जाने पर भ्रम की स्थिति, बोलने में कठिनाई, धुंधला दिखाई देना, दौरे पड़ना, बेहोशी और कोमा तक की नौबत आ सकती है।

लंबे समय तक अनशन से क्यों गिरता है ब्लड शुगर?

जब व्यक्ति कई दिनों तक भोजन नहीं करता तो शरीर सबसे पहले लीवर और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन का उपयोग करता है। यह भंडार लगभग 24 घंटे में खत्म होने लगता है।

इसके बाद शरीर ऊर्जा के लिए वसा को तोड़ना शुरू करता है, जिससे कीटोन (Ketones) बनने लगते हैं। यदि उपवास और लंबा चलता है तो शरीर मांसपेशियों और अंगों के प्रोटीन को भी तोड़ने लगता है। यही कारण है कि लंबे अनशन में तेजी से वजन घटता है, मांसपेशियां कमजोर होती हैं और ब्लड शुगर लगातार कम रहने लगता है।

पोटैशियम क्या है और इसकी भूमिका क्या है?

  • पोटैशियम शरीर का एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट है।
  • हृदय की धड़कन को नियंत्रित करता है।
  • नसों के संकेतों को पहुंचाने में मदद करता है।
  • मांसपेशियों को सही तरीके से काम करने देता है।
  • शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखता है।
  • रक्तचाप नियंत्रित रखने में भूमिका निभाता है।

शरीर में सीरम मे पोटैशियम का सामान्य स्तर 3.5–5.0 mEq/L होता है। इससे नीचे जाने की स्थिति को हाइपोकैलेमिया कहते हैं। सीरम में पोटैशियम का स्तर 2.5 mEq/L या उससे कम होने को मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है। सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर 2.9 mEq/L तक पहुंच चुका है, जो खतरे के करीब है। लंबे उपवास में लीवर-ग्लाइकोजन 24 घंटे में खत्म हो जाता है, फिर शरीर वसा और अंततः मांसपेशी-प्रोटीन तोड़ने लगता है, जिससे कीटोन बनने लगता है और वजन तेज़ी से गिरने लगता है। ऐसा ही वांगचुक के मामले में हो रहा है। उनका कीटोन बढ़ रहा है और शरीर का वजन कम होने लगा है।

यदि यह 3.5 mEq/L से नीचे चला जाए तो इसे हाइपोकैलेमिया (Hypokalemia) कहा जाता है।

पोटैशियम की कमी के शुरुआती लक्षण

  • थकान
  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • पैरों में ऐंठन
  • कब्ज
  • शरीर में सुस्ती

पोटैशियम की कमी जारी रहने पर हो सकती हैं गंभीर समस्याएं

  • दिल की अनियमित धड़कन (Arrhythmia)
  • सांस लेने वाली मांसपेशियों की कमजोरी
  • लकवे जैसी स्थिति
  • मांसपेशियों का टूटना (Rhabdomyolysis)
  • हृदय गति रुकने का खतरा

विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि पोटैशियम 2.5 mEq/L या उससे नीचे पहुंच जाए तो यह मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है।

लंबे उपवास में पोटैशियम क्यों घटता है?

लंबे समय तक भोजन नहीं करने से शरीर को पर्याप्त पोटैशियम नहीं मिल पाता। साथ ही शरीर की चयापचय (Metabolism) प्रक्रिया बदल जाती है। डिहाइड्रेशन, उल्टी, दस्त या केवल पानी पर रहने जैसी स्थितियों में भी पोटैशियम तेजी से कम हो सकता है। यदि मरीज पर्याप्त इलेक्ट्रोलाइट नहीं ले रहा हो तो स्थिति और गंभीर हो जाती है।

ब्लड शुगर और पोटैशियम दोनों साथ में कम हों तो खतरा कितना बढ़ जाता है? मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति में एक साथ ब्लड शुगर कम हो, पोटैशियम कम हो, डिहाइड्रेशन हो, और शरीर में कीटोन बढ़ रहे हों तो यह संकेत है कि शरीर ऊर्जा संकट (Metabolic Stress) में पहुंच चुका है।

इन हालात में शरीर के इन अंगों पर पड़ता है जोर

  • हृदय पर दबाव बढ़ जाता है।
  • मस्तिष्क को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती।
  • रक्तचाप गिर सकता है।
  • किडनी पर असर पड़ सकता है।
  • मांसपेशियां तेजी से टूटने लगती हैं।

सफदरजंग अस्पताल के स्वास्थ्य बुलेटिन में वांगचुक के मामले में कम ब्लड शुगर, गिरता पोटैशियम और बढ़े हुए कीटोन स्तर का उल्लेख किया गया है, जो लंबे उपवास के दौरान शरीर में होने वाले मेटाबॉलिक बदलावों की ओर संकेत करता है।

डॉक्टर ऐसे मरीज का इलाज कैसे करते हैं?

यदि मरीज इलाज के लिए सहमत हो तो डॉक्टर सामान्यतः इन बातों की सलाह देते हैं।

  • ओरल ग्लूकोज
  • इलेक्ट्रोलाइट घोल (ORS)
  • पोटैशियम सप्लीमेंट
  • जरूरत पड़ने पर IV फ्लूइड
  • लगातार ECG मॉनिटरिंग
  • बार-बार ब्लड टेस्ट

गंभीर मामलों में ICU निगरानी भी आवश्यक हो सकती है।

क्या केवल पानी पीने से शरीर सुरक्षित रहता है?

  • नहीं।

केवल पानी पीने से डिहाइड्रेशन कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन शरीर को ऊर्जा, ग्लूकोज, प्रोटीन, विटामिन और इलेक्ट्रोलाइट नहीं मिलते। इसलिए लंबे समय तक केवल पानी पर रहने से शरीर धीरे-धीरे अपनी वसा और फिर मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा बनाना शुरू कर देता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और मेडिकल संस्थानों की क्या राय है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), अमेरिकी नेशनल इंस्टिट्यूट आफ हेल्थ (National Institutes of Health or NIH) और मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, लंबे समय तक उपवास के दौरान इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, हाइपोग्लाइसीमिया और डिहाइड्रेशन जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए ऐसे मरीजों की नियमित चिकित्सा निगरानी और समय-समय पर रक्त जांच आवश्यक मानी जाती है।

Updated on:
21 Jul 2026 03:00 pm
Published on:
21 Jul 2026 03:00 pm