
महोबा. जनपद में पिछले कुछ दिनों से उपभोक्ताओं के नलों से दूषित पानी आ रहा है जिसको लेकर उपभोक्ता बहुत परेशान हैं और इसका प्रयोग वह पेयजल के रूप में नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें डर है कि कही इसके सेवन से वे संक्रामक बीमारी का कही शिकार न हो जाएं। यही वजह है कि उपभोक्ताओं को पेयजल के रूप में पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए हैण्डपम्पों की शरण लेनी पड़ रही है।
जिले में मानसून मेहरबान
पिछले कुछ दिनों से जिले में मानसून मेहरबान है और कभी तेज तो कभी हल्की बारिश हो रही है। उधर मध्यप्रदेश की घाटियों में बारिश होने से उर्मिल बांध का पानी लगातार बढ़ रहा है। ध्यान रहे कि शहर में जलापूर्ति उर्मिल बांध की पानी से ही होती है इधर जल स्तर में बढ़ोत्तरी होने के बाद उर्मिल सागर के पानी को बिना शोधन किए ही आपूर्ति के लिए सीधे नलों तक भेजा जा रहा है। जिसके चलते उपभोक्ताओं के नलों से मटमेला व दूषित पानी आ रहा है। यह व्यवस्था पिछले तीन दिनों से गड़बड़ाई हुई है।
जलराशि व भोजन निर्माण में नही कर पा रहे पानी का उपयोग
इस बात की शिकायत उपभोक्ताओं ने सम्बन्धित विभाग से भी की है और जलराशि को शोधन के बाद नलों तक भेजने की बात उठाई गई है। परन्तु अभी तक इस दिशा में सम्बन्धित विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, हालांकि उर्मिल सागर में जलराशि बढ़ने के बाद शहर में पानी की दिक्कत कम हुई है और नलों से होने वाली आपूर्ति की समयावधि में वृद्धि हुई है। जिससे लोगों को पानी की तकलीफों से दो चार नहीं होना पड़ रहा है लेकिन इसका प्रयोग वे जलराशि व भोजन निर्माण में नही कर पा रहे हैं।
हैण्डपम्पों ने पानी देने से जबाव दे दिया
यही वजह है कि पानी की पर्याप्त आपूर्ति के बाद भी पेयजल के लिए लोगों को हैण्डपम्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इधर भू गर्भीय जल स्तर बढ़ जाने के बाद जबाव देने लगे हैण्डपम्प भी पानी उगलने लगे है और अब लोगों को हैण्डपम्पों से पानी निकालने में तकलीफ नहीं उठानी पड़ रही है। कोई एक महीने पहले तक शहर के अधिकांश हैण्डपम्प भू गर्भीय जल स्तर सरक जाने के बाद पानी को लेकर परेशान होने लगे थे क्योंकि हैण्डपम्पों ने पानी देने से जबाव दे दिया था। लेकिन अब वह परेशानी बारिश के बाद समाप्त हो चुकी है लेकिन दूसरी तरफ नलों से आने वाला दूषित पानी लगातार लोगों की परेशानियों को बढ़ाए हुए है।