गठबंधन की संभावना से घटने बढ़ने लगी हैं लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं के दिलों की धड़कनेें, लोकसभा सीट के उप चुनाव में बसपा सपा के करीब आने से...
यशोदा श्रीवास्तव
लोकसभा चुनावः गठबंधन हुआ तो इस सीट पर किसकी दावेदारी हो सकती है मजबूत
महराजगंज. गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में आए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर ने सपा बसपा के एक साथ आने पर तंज जरूर कसा है लेकिन लोकसभा चुनाव की तेैयारी में जुटे कांग्रेस, सपा तथा बसपा के नेता सहम तो गए ही हैं। वे इसे 2019 के लोकसभा चुनाव में संभावित गठबंधन की दृष्टि से देखने लगे हैं। महराजगंज में सपा के एक नेता ने कहा कि, राजबब्बर की क्या, उन्हें तो 2017 के विधानसभा चुनाव में भी अंत तक सपा और कांग्रेस के गठबंधन की भी खबर नहीं थी।
फिलहाल सपा बसपा और कांग्रेस के बीच यदि गठबंधन हुआ तो महराजगंज संसदीय सीट किसके हिस्से में जा सकती है। इस पर बहस मुबाहिसा होना लाजिमी है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में सपा कांग्रेस गठबंधन के दौर में सीटों का बंटवारा चैकाने वाला था। याद दिला दें कि, जिले के पांच विधानसभा सीटों पर कांग्रेस दो सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन ये दोनों ही सीटें सपा के कब्जे में रही है। जबकि नौतनवा सीट जो कांग्रेस के कब्जे में थी। वहां से सपा को टिकट दिया गया था। यहां कांग्रेस के जो विधायक थे वे सपा का दामन थाम लिए थे जबकि सुरक्षित महराजगंज सदर तथा फरेंदा विधानसभा की सीट से सपा विधायक के होते हुए भी इन सीटों पर कांगे्रस के दावेदारों को टिकट दिया गया था। ऐसी स्थित में यह सोचना बेमानी होगा कि पिछले लोकसभा चुनाव में मिले वोट टिकट की दावेदारी का पैमाना हो सकता है।
पिछले लोकसभा चुनाव के परिणाम को देखा जाय तो विनर रही भाजपा के बाद बसपा दूसरे सपा तीसरे तथा कांग्रेस चैथे नंबर पर रही है। फिलहाल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में सपा,बसपा तथा कांगे्रस तीनों ही हैं। कुछ उम्मीदवारों ने तो होली की बधाई के बहाने अपने पोस्टर भी टांग दिए हैं। लेकिन गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा बसपा के एक साथ आ जाने से सभी सकते में आ गए। मजे की बात है कि, भाजपा के मुकाबले महागठबंधन की बात तो सभी करते हैं लेकिन साथ ही वे चाहते हैं कि टिकट उन्हें ही मिले।
महराजगंज संसदीय सीट से महागंठबंधन में कांग्रेस आसानी से अपनी कुर्बानी दे सकती है क्योंकि उसके पास यहां अभी उम्मीदवार का टोटा है। पूर्व सांसद स्व हर्षवर्धन की बेटी सुप्रिया का नाम चल रहा है, लेकिन फैसला उनके हां करने पर ही होगा। इस नाम के अलावा कांग्रेस के पास कोई ऐसा नाम नही है जो जीत तो दूर मजबूती से चुनाव ही लड़ सके। दावेदार तो कई हो सकते हैं। अब बचे सपा और बसपा। बसपा से विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पंाडेय के नाम की चर्चा है तो सपा से पूर्व सांसद अखिलेश सिंह की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। गठबंधन की स्थित में सपा और बसपा में से किसे मिल सकता है टिकट, कह पाना मुश्किल है। वहीं जानकार कहते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में भले ही वोटों की दृष्टि से कागें्रस बहुत पीछे रही हो लंकिन यदि वह दावेदारी करेगी तो सपा और बसपा दोेनों ही आसानी से अपनी दावेदारी छोड़ देंगे।
बहरहल गठबंधन के कयास के बीच इस बात पर भी बहस जारी है कि, क्या लोकसभा चुनाव में बसपा सपा और कांग्रेस का गठबंधन सचमुच हो सकता है। सपा बसपा और कांगे्रस के कई बड़े नेता अभी इस पर भी संशय में हैं। वैसे गठबंधन की खबरों के बीच चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे तीनों दलों के नेताओं के दिलों की धड़कने घटने बढ़ने लगी हैं।