स्मार्टफोन का बढ़ता बिजनेस और लोगों के बीच बढ़ती इंटरनेट की पहुंच ने कई कंपनियां अपने कारोबार को और पंख देने के लिए ऑनलाइन का रास्ता अपना रही हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ सालों में इस तरह का बिजनेस अरबों डॉलकर का हो जाएगा। डिजिटाइजेशन ने पूरी दुनिया में अपनी पैठ बना ली है और भारत भी इससे अछूता नहीं रह गया है।
स्मार्टफोन का बढ़ता बिजनेस और लोगों के बीच बढ़ती इंटरनेट की पहुंच ने कई कंपनियां अपने कारोबार को और पंख देने के लिए ऑनलाइन का रास्ता अपना रही हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ सालों में इस तरह का बिजनेस अरबों डॉलकर का हो जाएगा। डिजिटाइजेशन ने पूरी दुनिया में अपनी पैठ बना ली है और भारत भी इससे अछूता नहीं रह गया है। ऑटोमेशन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य नवाचार काम की मौलिक प्रकृति को बदल रहे हैं, इसलिए डिजिटाइजेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, ऑटोमेशन और अन्य तकनीक की मदद से उत्पादन में बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन, ये प्रौद्योगिकियां नौकरियां, कौशल, वेतन और काम की प्रकृति पर स्वचालन के व्यापक प्रभाव के बारे में कठिन सवाल भी उठाती हैं।
क्या है डिजिटल मार्केटिंग
कुछ मायनों में, डिजिटल मार्केटिंग पारंपरिक विपणन से अलग नहीं है। आपका एक उत्पाद है जिसको आपको बेचना है और ब्रांड जागरुकता पैदा करने के लिए ग्राहकों के साथ जुडऩे के तरीकों की तलाश कर अपने उत्पादेां को बेचा जा सके। डिजिटल मार्केटिंग में पहले से कहीं अधिक भूमिकाएं और कौशल शामिल हैं, इसका लचीला पन, बहुमुखी प्रकृति इसे आकर्षक और रोमांचक बनाती है।
किस प्रकार के होते हैं डिजिटल मार्केटिंग जॉब्स
-वीडियो/ऑडियो प्रोडक्शन
-इंटरैक्टिक तकनीक (जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)
-मोबाइल मार्केटिंग
-सोशल मीडिय
-ई-कॉमर्स
-इमेल मार्केटिंग, आदि
हालांकि, आज का समय डिजिटाइजेशन और आर्टिफिशल इंटेलीजेंस का है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा नकारात्मक असर भारत के मजबूरों पर पड़ेगा। इसके चलते नौकरियों में बड़े स्तर पर कटौती की जाएगी। यह बात एक रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट में पूछा गया है कि क्या इससे नौकरियां बढ़ेंगी या कम होंगी, तो जवाब था कि नौकरियों में कटौती ही की जाएगी। दुनिया में इसका सबसे ज्यादा भारत में होगा। देश में नियोक्ता डिजिटलीकरण के कारण नौकरियों में कटौती कर सकते हैं। हालांकि, आईटी और कस्टमर केयर सेक्टरों में कटौती की संभावना कम होगी, बल्कि इन दोनों सेक्टरों में नौकरियां बढ़ेंगी हीं। डिजिटलीकरण का सबसे ज्यादा बुरा असर वित्त और अकाउंटिंग सेक्टर पर पड़ेगा। इसके बाद उत्पाद और प्रबंधन सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ेगा।