2017 में भी नतीजे कुछ ऐसे ही थे। तब 32 इंजीनियरिंग डिग्री वाले सीईओ की तुलना में केवल 29 टॉप सीईओ के पास ही प्रबंधन के क्षेत्र में डिग्री थी। हालांकि शीर्ष स्थान किसी इंजीनियर को नहीं मिला है।
प्रबंधन की बाइबिल कही जाने वाली हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू (HBR) की हालिया जारी वार्षिक रैंकिंग में लगातार दूसरे साल भी शानदार प्रदर्शन दोहराने वाले दुनिया के ज्यादातर मुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ) इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं। हार्वर्ड की ओर से जारी इस रिपोर्ट के अनुसार बिजनेस में बाजार आधारित रणनीति और वित्तीय मामलों में दखल रखने वाली प्रबंधन की डिग्री (एमबीए) की तुलना में इन शीर्ष ‘बॉस’ की सफलताओं में इंजीनियरिंग का काफी अहम रोल है। इसने युवा इंजीनियर्स के लिए भी संभावनाओं के द्वार खोले हैं।
इस साल के १०० टॉप सीईओ में से ३४ के पास इंजीनियरिंग डिग्री है। जबकि इस सूची में शामिल अन्य ३२ सीईओ एमबीए बैकग्राउंड से हैं। वहीं आठ मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऐसे भी हैं जिनके पास प्रबंधन और इंजीनियरिंग दोनों क्षेत्रों में डिग्री है। प्रबंधन के विशेषज्ञों का कहना है कि एक इंजीनियर का सारा ध्यान समस्या के समाधान की ओर होता है। इसके अलावा विश्लेषणात्मक कौशल और सोच के संरचनात्मक तरीके उसे दूसरों से अलग करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में इस सूची में इंजीनियर सीईओ की संख्या में और इजाफा होगा। यह इसलिए भी संभव लगता है क्योंकि तकनीक और डिजिटलाइजेशन अब किसी भी कंपनी की जरुरत बन चुका है।
हार्वर्ड बिजनेस रिपोर्ट के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार सूची में शामिल ज्यादातर इंजीनियर सीईओ यूरोप से हैं जबकि अधिकतर एमबीए डिग्रीधारी सीईओ अमरीका से। २०१४ में जहां केवल ८ सीईओ ही इंजीनियरिंग फील्ड से थे २०१८ में यह संख्या बढक़र २२ हो गई है।