शिक्षा, समाज सेवा, सरकारी क्षेत्र और बिजनेस से लेकर परफॉर्मिंग आर्ट, मेंटल हैल्थ जैसे क्षेत्रों में इस भाषा के प्रोफेशनल की काफी जरूरत होती है।
क्रिएटिव फील्ड में यदि आप कॅरियर बनाना चाह रहे हैं तो सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। शिक्षा, समाज सेवा, सरकारी क्षेत्र और बिजनेस से लेकर परफॉर्मिंग आर्ट, मेंटल हैल्थ जैसे क्षेत्रों में इस भाषा के प्रोफेशनल की काफी जरूरत होती है। इन प्रोफेशनल का काम सामने वाले के शब्दों को तय संकेतों में ढालकर दूसरे को इशारे में समझाना होता है। भाषा संकेत अंग्रेजी में ज्यादा प्रचलित माना जाता है।
कॅरियर के लिहाज से स्कूल और कॉलेजों में मूक बधिर बच्चों के अलावा सामान्य स्टूडेंट्स भी इस भाषा को सीख रहे हैं। इन छात्रों को दो अहम तरीकों से पढ़ाया जाता है। मौखिक संवाद और दूसरा इंडियन साइन लैंग्वेज। यह कोर्स तीन से चार माह को होता है। जिसमें साइन लैंग्वेज की बारीकी के अलावा शारीरिक अशक्तता से ग्रस्त बच्चों के शिक्षण के लिए कई अन्य कोर्स भी हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं में साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटर की आवश्यकता रहती है। साथ ही इस लैंग्वेज को सीखने वालों की पढ़ाई करने के दौरान नौकरी भी लग जाती है।
इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर, नई दिल्ली के अलावा रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया और इग्नू आदि कई संस्थान ऐसे हैं जहां साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटर से संबंधित डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और ग्रेजुएशन कोर्स भी संचालित होते हैं।