वर्तमान में जॉब्स की बढ़ती कमी के चलते अब ऐसे प्रोग्राम और कोर्सेज पर जोर दिया जा रहा है जो स्कूली शिक्षा के साथ ही पूरे किए जा सकें। इनके जरिए जॉब तो मिल ही सकती है साथ ही स्वरोजगार भी शुरू किए जा सकते हैं।
इन दिनों शिक्षा के क्षेत्र में विषयों के चुनाव को लेकर मानसिकता बदल रही है। कॅरियर काउंसलर्स के अनुसार हाल तक युवा कृषि से दूर हो रहे थे। वर्तमान हालात में कृषि को बढ़ावा देने के लिए सबसे ज्यादा काम हो रहा है। इसके लिए कई कोर्सेज भी हैं। दसवीं के बाद पॉलिटेक्निक में जाकर विद्यार्थी अपना भविष्य तय कर सकते हैं। बारहवीं कक्षा के बाद रोजगार परक शिक्षा को लेकर इग्नू से भी कई कोर्स कराए जा रहे हैं। मूलभूत जरूरतों के आधार पर कोर्स डिजाइन कर शिक्षा का एक नया पैटर्न तैयार करने की बात भी की जा रही है।
स्कूली शिक्षा से ही होंगे बदलाव
एक्सपर्ट्स के अनुसार रोजगारपरक शिक्षा मुहैया कराने को लेकर बदलाव की जरूरत है। इस संबंध में काम भी किए जा रहे हैं। वर्तमान में जो हालात हैं, उसमें इन्हें जल्द से जल्द इम्प्लीमेंट करने की जरूरत है। ये स्कूली शिक्षा के साथ ही शुरू की जानी चाहिए।
ये हो सकते हैं क्षेत्र
इंटीरियर डिजाइनिंग, एनीमेशन और मल्टीमीडिया कोर्स, कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग, योग, जिम इंस्ट्रक्टर, कृषि की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने वाले कोर्स में जा सकते हैं।
आपदा के बाद बदल गई जरूरतें
एक्सपर्ट्स के अनुसार आपदा के साथ जरूरते बदलती हैं। उसी आधार पर पाठ्यक्रमों का चुनाव किया जाना चाहिए। वर्तमान में ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या कम हो गई है, लेकिन जरूरत सबसे ज्यादा हैं, इनमें पॉलिटेक्निक हो चाहे मूलभूत जरूरतों को पूरा करने वाले कोई काम। इनसे आय के बेहतर साधन हासिल किए जा सकते हैं। अब युवाओं को बड़े टागरेट के बजाय हुनर के बारे में सोचना चाहिए।