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रितेश अग्रवाल – कभी बेचते थे मोबाइल सिम, आज है 35000 करोड़ की कंपनी के मालिक

वर्ष 2015 में एक इंटरव्यू के दौरान रितेश ने बताया था कि उन्हें हॉस्पीटेलिटी सेक्टर में कंपनी का आइडिया टीवी के रिमोट से आया था।

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Mar 06, 2019
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इंडियन हॉस्पिटेलिटी कंपनी ओयो रुम्स एक बार फिर सुर्खियों में है। चाइनीज कंपनी दीदी चुशिंग के कंट्रोल वाली स्टार वर्चु इनवेस्टमेंट का ओयो रुम्स में 700 करोड़ के निवेश की घोषणा की है। ओयो रुम्स मात्र सात साल में 35 हजार करोड़ के वैल्यू वाली कंपनी बन गई है। जिसका श्रेय जाता है कंपनी के फाउंडर और सीईओ रितेश अग्रवाल को। कॉलेज ड्रॉपआउट रितेश अग्रवाल ने साबित किया कि यदि एक अच्छा विजन हो और उसे पूर्ण करने के लिए मेहनत की जाए तो आप हर मंजिल पा सकते हैं।

साधारण परिवार में असाधारण काम
16 नवंबर 1993 को उड़ीसा के कटक के बिसम में साधारण मारवाड़ी परिवार में जन्मे रितेश अग्रवाल ने ओयो रुम्स की शुरुआत वर्ष 2013 में की थी। ओयो रुम्स स्टार्ट करने से पहले रितेश ने वर्ष 2012 में ओरावल स्टे नाम से एक कंपनी की शुरुआत की थी। जिसे बाद में वर्ष 2013 में उन्होंने ओयो रुम्स में कन्वर्ट कर दिया। रितेश आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।

वर्ष 2015 में एक इंटरव्यू के दौरान रितेश अग्रवाल ने बताया था कि उन्हें हॉस्पीटेलिटी सेक्टर में कंपनी का आइडिया टीवी के रिमोट से आया था। रितेश अग्रवाल एंटरप्रेन्योर बनने से पहले बिसाम में सिम कार्ड बेचते थे। स्कूल के बाद रितेश आईआईटी की तैयार के लिए कोटा आ गए लेकिन आईआईटी की तैयारी छोडक़र उन्होंने दिल्ली के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस व फाइनेंस में एडमिशन लिया।

कई देशों में बजता है रितेश का डंका
अपने स्टार्टअप ड्रीम को पूरा करने के लिए उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद ओरावल स्टे और फिर ओयो रुम्स की शुरुआत उन्होंने गुरुग्राम से की। आज ओयो रुम्स इंडिया के अलावा चीन, नेपाल, यूके, यूएई, दुबई, इंडोनेशिया में भी सर्विस उपलब्ध करा रहा है। कंपनी के अनुसार चीन के 280 शहरों के 5000 होटल में ओयो रुम्स उपलब्ध हैं।

Published on:
06 Mar 2019 03:16 pm
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