मैनेजमेंट मंत्र

3 लाख स्कूलों में अभी तक नहीं शौचालय

गैर सरकारी संगठन सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस आर्गनाइजेशन के प्रमुख डॉॅ. बिंदेश्वर पाठक ने 2011 की  
2 min read
• •
Updated: 3 Oct 2017, 9:42 AM IST
Not toilet in 3 lakh school yet
Not toilet in 3 lakh school yet

गैर सरकारी संगठन सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस आर्गनाइजेशन के प्रमुख डॉॅ. बिंदेश्वर पाठक ने 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए कहा कि देश में करीब 60 करोड़ लोगों के पास शौचालय की सुविधा नहीं है। साथ ही कुल 12 लाख स्कूलों में से 3 लाख स्कूलों में शौचालय नहीं है। देश में अगले पांच साल में सबके लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बीच इस मिशन की सफलता के लिए 50000 कार्यकर्ता और डेढ़ लाख राज मिस्त्री समेत कुल दो लाख लोगों को प्रशिक्षण देने की जरूरत होगी। ये प्रशिक्षित कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को शौचालय के बारे में जागरूक करेंगे और उसके निर्माण एंव रख-रखाव में सहयोग करेंगे। इतना ही नहीं ये प्रशिक्षण प्राप्त लोग लाभार्थियों को बैंक से कर्ज तथा सरकार से सब्सिडी प्राप्त करने में भी मदद करेंगे।

सरकारी विद्यालयों में जहाँ शौचालय अनिवार्यता के साथ सरकार ने कदम बढ़ाया था। और राजस्थान जैसे राज्यों में सफल भी रहा। लेकिन कुछ दुरस्त क्षेत्रों में अभी तक ये व्यवस्था नहीं हो पाई। वे ऐसे क्षेत्र है जहाँ पर शिक्षा का आभाव और वहां की गलत अवधारणाएं और मान्यताएं है।

घरों में भी नहीं बने शौचालय। बजट पूरा नहीं, छोड़ देते हैं काम
शौचालय निर्माण के लिए प्रत्येक को 12 हजार की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसमें से 4 हजार रुपए केंद्र सरकार, 4 हजार राज्य सरकार व 4 हजार नगर निगम की ओर से अदा की जाती है। 4 हजार की राशि एडवांस देने के बाद पूर्ण निर्माण व निगम लोगों लगाने के बाद बकाया 8 हजार रुपए अदा किए जाते है। दिक्कतें यह है कि बजट पूरा नहीं मिलने के चलते कई घरों में आधा अधूरा कार्य करके बीच में ही छोड़ दिया जाता है। कई बार शौचालय का लोगो नहीं लगने के कारण शौचालय चालू नहीं हो पाते हैं। कई ग्रामीण अब भी बजट के लिए चक्कर काट रहे हैं। केंद्र ने अब अलग-अलग घरेलू शौचालय सब्सिडी के लिए आवेदन करने वालों के लिए आधार अनिवार्य कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण के लिए ग्रामीण परिवारों को सब्सिडी दी जाती है।