मार्क जुकरबर्ग तथा स्टीव जॉब्स, इन दोनों ने ही अपनी कंपनी के लिए किसी दूसरे को स्पोक्सपर्सन नहीं बनाया वरन खुद सामने आए और फिर जो कुछ किया, उसने इतिहास रच दिया।
किसी भी कंपनी का फाउंडर होने के नाते आपको अपने ब्रांड का स्पोक्सपर्सन होना ही पड़ता है। हालांकि बहुत से लोगों को यह काम बहुत मुश्किल लगता है लेकिन जैसे आप अपनी कंपनी की कमान किसी और के हाथ में नहीं दे सकते, ठीक उसी तरह से आप किसी और को कंपनी का फेस नहीं बना सकते क्योंकि कंपनी का फाउंडर उसका प्रमुख मार्केटिंग टूल होता है। अगर आपके पास कंपनी का चेहरा बनने की सही स्किल या अनुभव नहीं है तो भी कुछ कारणों से आपको ऐसा करना ही होगा। उदाहरण के लिए मार्क जुकरबर्ग तथा स्टीव जॉब्स, इन दोनों ने ही अपनी कंपनी के लिए किसी दूसरे को स्पोक्सपर्सन नहीं बनाया वरन खुद सामने आए और फिर जो कुछ किया, उसने इतिहास रच दिया।
कस्टमर खरीदते हैं विजन
जब आप कंपनी के सीईओ या फाउंडर होने के नाते अपनी कंपनी के किसी प्रॉडक्ट की खासियत बताते हैं तो कस्टमर आप पर पूरी तरह से भरोसा करते हैं। वे आपके विजन को सही मानते हैं। वे प्रॉडक्ट के लिए थोड़े ज्यादा पैसे खर्च करने से भी गुरेज नहीं करते।
रिप्रजेंट करते हैं कस्टमर
कंपनी के फाउंडर होने के नाते जब आप किसी भी प्रॉडक्ट की खासियत बताते हैं तो एक तरह से आप अपने आपको बतौर कस्टमर ही प्रस्तुत करते हैं यानी उस वक्त आप कस्टमर होते हैं। ऐसे में कस्टमर को लगता है कि आपको उनकी परवाह है।
नए कस्टमर मिलते हैं
जब कंपनी के फेस बनकर लोगों को बताते हैं कि कैसे आपने बिजनेस शुरू किया। आपको कॉन्फ्रेंस, ईवेंट्स में बोलने का मौका मिलता है। अपने ब्रांड के स्पोक्सपर्सन होने के चलते आपको कई बार ऐसे इंवेस्टर और कस्टमर मिल जाते हैं, जो आपके साथ बल्क डील करके फायदा दिलाते हैं।
ऑफिसप्रेन्योर बनना
अगर आपका पहले से ही कोई फैमिली बिजनेस है तो फिर आप ऑफिसप्रेन्योर बनकर हेल्दी वर्क एनवायर्नमेंट क्रिएट कर सकते हैं। आप अपने ऑफिस का वर्क एनवायर्नमेंट ऐसा बनाएं कि हर टीम मेंबर को लगे कि वह कंपनी उसकी है, कंपनी की ग्रोथ बेहतर होगी।