आप रेस्टोरेंट बिजनेस से जुड़े हैं तो वर्चुअल किचन कॉन्सेप्ट के तहत फालतू पड़े स्पेस को रेंट पर देकर खासी कमाई कर सकते हैं।
इंडिया में फूड डिलीवरी एप का चलन बढऩे से स्मॉल रेस्टोरेंट्स की किचन में ऑर्डर तो बढ़े हैं, लेकिन रेस्टोरेंट में कस्टमर्स की संख्या घटने लगी है। किचन से तो रेस्टोरेंट मालिक प्रॉफिट कमा रहे हैं, लेकिन रेस्टोरेंट के स्पेस और मेंटिनेंस का खर्चा उन्हें परेशान कर रहा है। अमरीका में चलन में आया एक ट्रेंड अब इंडिया में भी जगह बनाने लगा है। यह है ‘वर्चुअल किचन’ कॉन्सेप्ट। रेस्टोरेंट मालिक वर्चुअल किचन को अपनाकर एक ही रेस्टोरेंट से दो बिजनेस चला सकते है। स्टॉर्टअप फील्ड में वर्चुअल या क्लाउड किचन कॉन्सेप्ट को हॉट केक माना जा रहा है। जानते हैं क्या है वर्चुअल या क्लाउड किचन मॉडल-
सिंपल लेकिन यूनीक है मॉडल
रेस्टोरेंट स्टॉर्टअप किसी बड़े सेटअप के बजाय छोटे स्पेस की तलाश में रहते हैं, जहां वे फूड डिलीवरी एप से मिलने वाले ऑर्डर को तैयार कर सकें। यदि आपके रेस्टोरेंट में कुछ स्पेस ऐसा है, जो काम नहीं आ रहा हो और मेंटिनेंस का खर्चा भी भारी पड़ रहा हो तो आप उसे ऐसे स्टॉर्टअप को किराए पर दे सकते हैं जो कि ‘वर्चुअल किचन’ या रेस्टोरेंट की तलाश में हो।
कैसे सर्च करें ऐसे एंटरप्रेन्योर को
ऐेसे एंटरप्रेन्योर को ढूंढऩे का बेहतरीन उपाय है वे रियल एस्टेट फर्म, जो कि ऑफिस स्पेस या कमर्शियल स्पेस के फील्ड में काम करती हैं। आप चाहें तो सोशल मीडिया को भी बेहतर विकल्प बना सकते हैं। इन माध्यमों के जरिए आप रेस्टोरेंट में वर्चुअल किचन की जानकारी दे सकते हैं।
इन बातों का रखें खास ध्यान
फूड डिलीवरी एप में सबसे विशेष होता है- रेस्टोरेंट के बारे में जानकारी। एग्रीमेंट के समय ध्यान रखें कि जिसे आपने स्पेस दिया है, वह आपके रेस्टोरेंट के एड्रेस को किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन प्लेटफॉर्म पर मेंशन नहीं करे। ध्यान रखें कि उस एंटरप्रेन्योर ने अपनी डिटेल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डालते समय केवल होम डिलीवरी का ऑप्शन रखा हो। यदि वह आपके एड्रेस का उपयोग करेगा तो आपको कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
लॉन्ग टर्म में है ज्यादा फायदा
यदि आप वर्चुअल किचन के लिए स्पेस और सामान दोनों दे रहे हैं तो आपको एंटरप्रेन्योर के साथ लीज या किराए का लॉन्ग टर्म कांट्रेक्ट करना चाहिए क्योंकि आपने सामान के लिए जो इंवेस्टमेंट किया है, जब तक उसकी कीमत वसूल नहीं होगी तब तक आपके लिए यह बिजनेस प्रॉफिटेबल नहीं होगा। वहीं आप प्रयास करें कि वर्चुअल किचन स्पेस के लिए ऐसा एंटरप्रेन्योर हो जो कि स्नैक्स फूड बिजनेस से जुड़ा हो क्योंकि ऐसे एंटरप्रेन्योर को लार्ज किचन सेटअप की आवश्यकता नहीं होगी। इससे आपको फायदा होगा। इससे आपको अपने स्पेस में ज्यादा बदलाव भी नहीं करने पड़ेंगे।
स्पेस नहीं हो तो भी इस कॉन्सेप्ट को अपना सकते हैं
यदि आपके रेस्टारेंट में वर्चुअल किचन के लिए स्पेस नहीं है तब भी अब इस मॉडल को अपना सकते हैं। दरअसल आप अपने रेस्टोरेंट की किचन को वर्चुअल किचन में तब्दील कर सकते हैं। जिस भी वर्चुअल रेस्टोरेंट स्टॉर्टअप को स्पेस की तलाश है, आप उसे अपनी किचन को इस्तेमाल करने का ऑफर दे सकते हैं। हालांकि यह आपको तय करना होगा वर्चुअल किचन का मॉडल क्या होगा। क्या आप उसे किचन में मौजूद सामान के साथ किराए पर देना चाहते हैं या फिर अलग से। हालांकि इस प्रकार के मॉडल में आपको इस बात का ध्यान रखने की आवश्यकता है कि आपके अपने बिजनेस को किसी तरह का नुकसान न हो।
प्रॉफिटेबल है यह बिजनेस
यदि आप अपने बेकार पड़े स्पेस से अच्छी खासी कमाई करना चाहते हैं तो इसके दो आसान तरीके हैं। पहला तरीका है कि उस स्पेस को वह जिस हालत में है, वैसे ही किराए या लीज पर दे दें। दूसरा तरीका ऐसा है, जिससे आप ज्यादा कमाई कर सकते हैं। इस तरीके में आप उस स्पेस को किराए पर देने से पहले उसे एक वर्चुअल किचन में कन्वर्ट कर दें। इसके एवज में न केवल आपको किराए के तौर पर ज्यादा कमाई होगी, बल्कि आप अपने स्पेस में अपनी मर्जी से काम भी करा सकेंगे।
पार्टनर बनें, डबल कमाएं
वर्चुअल किचन मॉडल में स्पेस के किराए के अतिरिक्त कमाई का अन्य जरिया पार्टनर बनना भी है। यदि आप इस मॉडल में पार्टनर बनकर काम करेंगे तो भी आप मुनाफा कमाएंगे। साथ ही इसका एक अन्य प्रॉफिट यह भी है कि आपने वर्चुअल किचन में जिन अच्छे संसाधनों का उपयोग किया है, उनका ध्यान भी रख सकेंगे। इसके अलावा आपके रेस्टारेंट में जो बेकार पड़ा सामान है उसका भी उपयोग हो सकेगा। प्रयास करें कि वर्चुअल किचन कॉन्सेप्ट में पार्टनर्स की संख्या ज्यादा नहीं हो।