
मेरठ। कोरोना की रोकथाम के लिए जनता कर्फ्यू के बाद अब 25 मार्च तक के लिए लॉक डाउन कर दिया गया है। लॉक डाउन के दौरान कोरोना संक्रमित की तलाश के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं।
कोरोना वायरस के संदिग्ध रोगियों की खोजबीन करने और ऐसे लोगों की जांच तथा उन्हें चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने लॉक डाउन के दौरान जनपद में कुल 38 रैपिड रेस्पांस टीमें गठित की हैं। इन टीमों को रविवार को दो चरणों में जनपद की कोरोना नोडल अफसर सीडीओ ईशा दुहन के नेतृत्व में प्रशिक्षण दिया गया। शहरी क्षेत्रों में 26 तथा 12 ब्लाकों में 12 टीमें हैं। ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी एडीएम प्रशासन को तथा शहर की जिम्मेदारी एडीएम सिटी को सौंपी गई है।
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सीडीओ ईशा दुहन ने बताया कि रेस्पांस टीमों को इस दौरान बताया गया कि ऐसे लोगों की तलाश करनी है जो कि कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीज हैं। विदेश से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की निगरानी की जानी है। यदि व्यक्ति कोरोना वायरस के संक्रमण के शिकार 13 देशों से आया है तो उसे अस्पताल में क्वारंटाइन किया जाना है। यदि किसी अन्य देश से व्यक्ति जनपद में आया है और उसमें लक्षण नहीं हैं तो उसे होम क्वारंटाइन किया जाना है। यदि ऐसे व्यक्ति में लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाना है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति मिलने पर एक किलोमीटर के क्षेत्र का सर्वे किया जाएगा। एक से ज्यादा केस एक ही क्षेत्र में मिल जाएं तो वहां विशेष अभियान चलाया जाएगा।
इस दौरान एसीएमओ डा. पूजा शर्मा, डा. विश्वास चौधरी, डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ तथा अन्य अधिकारियों ने बताया कि टीम में शामिल अफसरों और कर्मियों को खुद भी कोरोना से बचाव के लिए सावधानियां बरतनी होंगी। वहीं सर्विलांस अधिकारी विश्वास चौधरी ने बताया कि यह अच्छी बात हैं कि मेरठ में अभी तक कोई कोरोना पाजिटिव केस नहीं आया है। हमने जिले में अभी तक स्थिति को नियंत्रण में किया हुआ है। डीएम अनिल ढींगरा भी जनपद में गठित टीमों की पूरी मानिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अन्य विभागों की टीमें भी सर्विलांस टीमों को सहयोग कर रही हैं।