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‘बाघ है तो जंगल सुरक्षित, कानून है तो मनुष्य’, महाभारत के इस श्लोक से जज ने ‘नीले ड्रम कांड’ में दिया न्याय का संदेश; गूंजे भारत माता के जयकारे

Saurabh Rajput Murder Case: मेरठ के चर्चित नीले ड्रम कांड में अदालत ने मृत्युदंड का फैसला सुनाया। पति सौरभ राजपूत की हत्यारी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा दी गई। जज ने फैसले में महाभारत के श्लोकों का जिक्र किया। जानिए पूरा मामला...
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मेरठ

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Mohsina Bano

•

Oct 15, 2026

Blue Drum Verdict News

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सज़ा सुनाई, लेकिन फांसी के लिए हाईकोर्ट की पुष्टि अनिवार्य है। ( फोटो डिजाइन : ChatGPT)

Blue Drum Murder Case Meerut: उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम वाले 'सौरभ राजपूत हत्याकांड' में अदालत ने अपना अहम फैसला सुना दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने बुधवार को पति की क्रूरता से हत्या करने वाली मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा मुकर्रर की। सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि प्रजा जब सोती है तब भी कानून जागता है। खचाखच भरे न्यायालय में जज के सजा का ऐलान करते ही भारत माता की जय के नारे गूंजने लगे।

महाभारत के श्लोक से दिया न्याय का संदेश

जिला जज ने 163 पेज के मृत्युदंड के आदेश में महाभारत के श्लोकों का विशेष जिक्र किया। जिला जज ने मृत्युदंड के आदेश में विदुर द्वारा धृतराष्ट्र को कहे गए महाभारत के श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि, "निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्। तस्माद्व्याघ्रो वनं रक्षेद्वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥ अर्थात्, जिस तरह बाघ के होने से जंगल सुरक्षित रहता है, उसी तरह कानून के होने से मनुष्य सुरक्षित रहते हैं। न्याय का धर्म है कि अपराधी को उसके अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार सजा मिले।" जज ने स्पष्ट कहा कि मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या कर शव के टुकड़े किए और उन्हें नीले ड्रम में छिपा दिया। इस बर्बर अपराध के लिए मृत्युदंड से कम कोई सजा नहीं दी जा सकती।

'बेटियों की दुहाई काम न आई'

बुधवार सुबह सजा पर सुनवाई के दौरान मुस्कान और साहिल को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। मुस्कान ने अपनी दो छोटी बेटियों के भविष्य की दुहाई देते हुए अदालत से रहम की भीख मांगी। बचाव पक्ष के वकील ने भी दोनों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास न होने का तर्क दिया। वहीं अभियोजन पक्ष ने इसे एक शातिर और क्रूर साजिश बताते हुए फांसी की मांग की जिसे अदालत ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया।

हत्या और साक्ष्य छिपाने के मामले में अलग-अलग सजा

अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (1) के तहत हत्या और धारा 3 (5) के तहत साझा इरादे से किए गए अपराध के लिए मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाया। वहीं, धारा 238 (ए) के तहत साक्ष्य छिपाने के मामले में 7 साल की सजा दी गई। अदालत ने हत्या के मामले में दोनों पर 50 हजार रुपये और साक्ष्य छिपाने के मामले में 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। हालांकि, निचली अदालत से मृत्युदंड मिलने के बाद भी सजा लागू होने से पहले उच्च न्यायालय की पुष्टि जरूरी है। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने का कानूनी अधिकार भी है।

माता-पिता ने हत्यारी बेटी से तोड़ा नाता

इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाली मुस्कान के माता-पिता प्रमोद रस्तोगी और कविता रस्तोगी ने अपनी बेटी से सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं। उन्होंने अदालत में लिखित में दिया कि सौरभ एक बहुत अच्छा लड़का था और मुस्कान ने रिश्ते को बुरी तरह कलंकित किया है। उन्होंने साफ कहा कि वे अपनी बेटी की कोई पैरवी नहीं करेंगे और फांसी की सजा मिलने पर भी उसके साथ नहीं खड़े होंगे।

सौरभ की मां के छलके आंसू बोलीं सही सजा मिली

सजा सुनाए जाने के वक्त सौरभ की मां रेनू देवी और भाई बबलू अदालत में मौजूद थे। फैसला सुनते ही रेनू देवी फूट फूट कर रोने लगीं। उन्होंने कहा कि मुस्कान और साहिल ने उनके बेटे के साथ जो अमानवीय बर्बरता की है उसके लिए फांसी ही सबसे सही सजा है। वहीं सौरभ के भाई बबलू ने कहा कि पिता आज तक गहरे डिप्रेशन में हैं। इस फैसले से उन्हें न्याय मिला है। अगर दोषी ऊपरी अदालत में जाते हैं तो वह फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

क्या था पूरा मामला

सौरभ राजपूत ने साल 2016 में मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। साल 2019 में दोनों के बीच विवाद हुआ और वे अलग हो गए। उसी साल मुस्कान ने बेटी पीहू को जन्म दिया, जो अब अपने नाना-नानी के पास रहती है। बाद में परिवार ने दोनों के बीच समझौता कराया और वे साथ रहने लगे। इसके बाद सौरभ लंदन चला गया। इसी दौरान मुस्कान की अपने स्कूल के सहपाठी साहिल शुक्ला से नजदीकियां बढ़ गईं।

24 फरवरी 2025 को सौरभ लंदन से भारत लौटा था। आरोप है कि तीन मार्च की रात मुस्कान और साहिल ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे बेहोश किया। इसके बाद चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी। शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में रखे गए और उसमें सीमेंट भर दिया गया।पुलिस ने मामले में करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में ट्रायल शुरू हुआ। अभियोजन पक्ष ने अब तक 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। जांच के दौरान चाकू, उस्तरा, सीमेंट, बालू और नीला ड्रम खरीदने से जुड़े तथ्य सामने आए। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से मिले सबूतों के बारे में गवाही दी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में धारदार हथियार से चोट लगने की पुष्टि हुई। इन सबूतों के आधार पर अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया।

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