
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में लापरवाही के मामले तो आए दिन सामने आते रहते हैं, लेकिन इस बार एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। मामला उत्तर रेलवे के तहत आने वाले लखनऊ जोन से जुड़ा हुआ है। यहां सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि रेलवे के 3 कर्माचरियों की सैलरी बनाने के लिए लखनऊ रेलवे विभाग में 42 लोग काम कर रहे हैं। सीएजी ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे विभाग के 3 कर्मचारियों की सैलरी का हिसाब-किताब 42 लोग मिलकर करते हैं। रेलवे विभाग इन 3 कर्मचारियों का वेतन बनवाने के लिए 42 कर्मचारियों को वेतन देता है।
10.70 करोड़ रूपए किए गए भुगतान
कैग की कैश ऑफिस की ऑडिट में पाया गया है कि पिछले तीन सालों में इन 42 कर्मचारियों के वेतन के रूप में 10.70 करोड़ रूपये भुगतान किए गए हैं। दरअसल, लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर इन 42 कर्मचारियों को कैश में वेतन बांटने के लिये नौकरी पर रखा गया था।
बिना काम के दिया जा रहा है वेतन
ये ऑफिस रेलवे के कर्मचारियों को नगद वेतन बांटने के लिये बनाया गया था। लेकिन डिजिटलाइजेशन के शुरू हो जाने की वजह से कर्मचारियों का वेतन कैश में दिए जाने की बजाए सीधे अकांउट मे भेजा जाने लगा। लिहाजा, कैश में वेतन बांटने वाले कर्मचारियों के पास कोई काम ही नहीं रह गया। इसके बावजूद कैश ऑफिस के कर्मचारियों को वेतन बांटने के एवज में वेतन दिया जा रहा है। कैग रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि जब सैलरी सीधे खाते में जा रही है तो इन कर्मियों को किस बात का वेतन दिया जा रहा है।
लखनऊ कैश ऑफिस में बस कुछ ही काम
रिपोर्ट के मुताबिक, कैश ऑफिस में उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के छोटे स्टेशनों पर टिकटों से होने वाली आमदनी जमा कराई जाती है। इसके लिए कैश को चमड़े की थैलियों में भरकर लोहे के भारी-भरकम बक्से के जरिए ऑफिस भेजा जाता है। कर्मचारी आरपीएफ व पोर्टर की मदद से इस रकम को बैंक में जमा करवाता है। फिर भी, इस काम में कुछ कर्मचारी ही लगते हैं।