
नई दिल्ली। फिलहाल इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) चंद्रयान-2 मिशन को लेकर हर संभव कोशिश करने में जुटा है। इसरो आंकड़ों का विश्लेषण कर पता करना चाहता है कि चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के अंतिम वक्त विक्रम लैंडर के साथ क्या गलत हुआ। सतह से केवल 2.1 किलोमीटर की दूरी पर इसरो का लैंडर के साथ संपर्क टूट गया। ऐसा लगता है कि विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर क्रैश हो गया और अब इससे संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। अब एक ताजा खबर आई है कि नासा इसमें कुछ मदद करने वाला है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) वास्तव में चंद्रमा की जिस सतह पर विक्रम लैंडर को लैंडिंग करनी थी, उसकी पहले और बाद की तस्वीर शेयर करेगा। नासा के प्रवक्ता ने ईमेल के जरिये न्यूयॉर्क टाइम्स से यह बात कंफर्म की।
वहीं, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की लोकेशन पता चलने के बाद इसरो के चीफ के सिवन ने कहा था कि पूरी संभावना है कि इसने हार्ड लैंडिंग की होगी। इसकी लोकेशन का पता चंद्रयान-2 ऑर्बिटर में लगे कैमरों ने रिकॉर्ड की।
इसके अलावा सिवन ने यह भी कहा था कि अभी तक उन्हें विक्रम लैंडर की कंडीशन क्या है, इसका पता नहीं चल पाया है।
वहीं, एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि लैंडर टूटा नहीं है और यह अभी तक एक ही पीस में है, लेकिन चंद्रमा की सतह पर तिरछा पड़ा हुआ है। यह लोकेशन उस जगह के करीब है जहां इसको लैंडिंग करनी थी।
इधर, इसरो की टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) टीम फिलहाल लैंडर से दोबारा संपर्क साधने की कोशिश में जुटी हुई है।