9 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Expensive books in private schools: शहर के अधिकांश प्राइवेट स्कूल चला रहे महंगी किताबें, DEO की बैठक में हुई पुष्टि, दिए ये 5 निर्देश

Expensive books in private schools: शहर में संचालित निजी स्कूल संचालकों की डीईओ ने ली बैठक, कहा- आपलोग अभिभावकों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बना रहे हैं दबाव, शिकायत पर की जाएगी कार्रवाई

4 min read
Google source verification
Expensive books in private schools

DEO meeting with Private school Administrations and book shops owners (Photo- Patrika)

अंबिकापुर। शहर के निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी किताबें, कॉपियां (Expensive books in private schools) और यूनिफॉर्म तय दुकानों से खरीदने के दबाव के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को आयोजित बैठक में कई स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, जिसके बाद कड़े निर्देश जारी किए गए। बैठक में सामने आया कि कई बड़े निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों की सूची तय दुकानदारों को देकर अभिभावकों को वहीं से सामग्री खरीदने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बाध्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

डीईओ के आरोप पर शुरु में तो स्कूल प्रबंधन ने इनकार किया, लेकिन विस्तृत चर्चा में कई मामलों में मिलीभगत की बात सामने आई। कुछ स्कूलों (Expensive books in private schools) ने यह भी स्वीकार किया कि वे निश्चित दुकानों को किताबों की सूची उपलब्ध कराते हैं। डीईओ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी स्कूलों में एनसीईआरटी, सीबीएसई, एसीईआरटी की किताबें अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएं।

निजी प्रकाशकों की किताबों को लेकर नियमों का पालन करना होगा। जांच में पाया गया कि कक्षा 1 से 8 तक की किताबों-कॉपियों का खर्च 3500 से 8000 रुपए (Expensive books in private schools) तक लिया जा रहा है, जो एनसीईआरटी की किताबों की तुलना में कई गुना अधिक है। इस पर डीईओ ने कड़ी नाराजगी जताई।

होली क्रॉस स्कूल ने पहले दी सफाई

डीईओ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार होली क्रॉस कान्वेंट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय द्वारा अवगत कराया गया कि हमारी संस्था द्वारा किसी दुकान विशेष से पुस्तकें, कॉपियां व ड्रेस किसी विशेष दुकान (Expensive books in private schools) से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा रहा है। डीईओ के अनुसार इस संबंध में जब विस्तृत व वन-टू-वन जानकारी ली गई।

इसमें यह बात सामने आई कि अम्बिकापुर शहर के लगभग सभी बड़े निजी विद्यालयों द्वारा एक निश्चित पुस्तक विक्रेता दुकानदारों से साठगांठ कर विद्यालय स्तर से चयनित रेफरल/पूरक पुस्तकें, कॉपियों की सूची प्रदाय कर अभिभावकों पर पूर्व से निर्मित बंडल के अनुसार अत्यधिक मंहगी-मंहगी किताबें, कांपियां, अन्य सामग्री एवं यूनिफार्म क्रय करने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाया जा रहा है।

Expensive books in private schools: मुंबई से होती है निर्धारित

बिरला ओपन माइंड अंतरराष्ट्रीय विद्यालय अम्बिकापुर द्वारा अवगत कराया गया कि हमारी संस्था का मुख्यालय मुबई में हैं, सभी किताबें वहीं से निर्धारित होती हैं। एनसीईआरटी के अतिरिक्त मुख्यालय से निर्धारित की गई किताबें विद्यालय में चलाई जा रही हैं, जो अम्बिकापुर के स्कूल वल्र्ड दुकान (Expensive books in private schools) से प्राप्त हो रहे हंै।

इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने आपत्ति व्यक्त की औ कहा कि आप तो स्वयं प्रमाणित कर रहे हैं कि एक निश्चित दुकान से महंगी किताबें अभिभावकों को क्रय करने हेतु विवश किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे 12 माह का शुल्क बच्चों से लिया जा रहा है, इस पर भी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आपत्ति की गई। जबकि सभी विद्यालयों ने बताया कि हम केवल 10 माह की फीस ले रहे हैं।

5वीं तक निजी प्रकाशक की किताबें

कार्मेल स्कूल (Expensive books in private schools) द्वारा बताया गया कि विद्यालय में कक्षा 5वीं तक केवल निजी प्रकाशकों की किताबें ही पढ़ाई जा रही है। एनसीईआरटी की किताबें नहीं पढ़ाई जा रही हैं। इस पर डीईओ ने आपत्ति करते हुए कहा कि आप सभी सीबीएसई एफिलेशन बाई लॉ 2018 के क्लॉज 2 अपै्रल 2006 व 2 अपै्रल 2007 का अवलोकन करें। इसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि एनसीईआरटी/सीबीएसई पाठ्यक्रम अनिवार्य है। एनसीईआरटी पुस्तकें प्राथमिकता से उपयोग किए जाएं।

इन दुकानों के आए नाम

बैठक में ब्रदर सेवक गैब्रियल के प्राचार्य मॉन्ट फोर्ड विद्यालय (Expensive books in private schools) द्वारा यह स्वीकार किया गया कि आशा बुक डिपो, राणा ब्रदर्स, अजीत बुक डिपो को पुस्तकों की सूची उपलब्ध कराई गई हैं। इन्हीं दुकानों से अभिभावक सामग्री क्रय कर रहे हैं।

इस पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कहा गया कि यह तो स्वयं प्रमाणित हो रहा है कि आप सभी द्वारा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से निजी प्रकाशकों से मिलीभगत कर किसी दुकान विशेष से पुस्तक कॉपियों, अन्य सामग्री, यूनिफार्म इत्यादि का क्रय कराते हुए भारी मुनाफा कमाया जा रहा है। यह कृत्य कार्रवाई योग्य है।

नियम तोडऩे पर सख्त कार्रवाई

डीइओ ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में निजी प्रकाशकों की किताबें (Expensive books in private schools) जबरन चलाने या तय दुकानों से खरीद का दबाव साबित हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वसूली गई राशि का 10 गुना तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

ये भी निर्देश जारी

1. रेफरल/पूरक पुस्तकों की पीडीएफ उपलब्ध कराना अनिवार्य
2. पुरानी किताबों और फोटो कॉपी के उपयोग की अनुमति
3. स्कूल लाइब्रेरी में हर कक्षा की 5 सेट (Expensive books in private schools) किताबें रखना जरूरी
4. फीस निर्धारण समिति से मंजूरी के बाद ही शुल्क लागू होगा
5. किताबों की सूची 45 दिन पहले वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य

डीईओ बोले- शिकायत पर होगी कार्रवाई

सरगुजा डीईओ दिनेश झा ने कहा कि निजी स्कूलों की बैठक ली गई है। अधिकांश बड़े स्कूलों में कुछ न कुछ कमियों पाई गई है। नियम को पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं किसी भी अभिभावक को किताब व कॉपी के लिए बाध्य नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों में एनसीईआरटी, सीबीएसई, एसीईआरटी की किताबें अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाए। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो शिकायत (Expensive books in private schools) पर कार्रवाई की जाएगी।

बड़ी खबरें

View All

अंबिकापुर

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग