MSP को कानूनी गारंटी देने के सिवाय कोई विकल्प नहीं। इस मुद्दे पर राहत की उम्मीद न करे केंद्र सरकार।
नई दिल्ली। नए साल के आगाज के बावजूद दिल्ली बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन और लंबा खिचने के आसार हैं। ऐसा इसलिए कि किसान संघों के नेताओं ने साफ संकेत दे दिए हैं कि एमएसपी का कोई अन्य विकल्प नहीं हो सकता। वरिष्ठ किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने आगे की कदम के बारे में चर्चा के लिए शुक्रवार को एक और बैठक बुलाई है। लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी और कृषि कानूनों को निरस्त करने वाले दो मुद्दों से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।
दो दिन पहले प्रतिनिधियों और किसान संघों के नेताओं के बीच हुई बैठक में केंद्र ने एमएसपी के कानूनी विकल्प ढूंढने की अपील की थी। इससे दो दिन पहले केंद्र और प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के बीच बातचीत हुई, जिसमें दो विवादास्पद मुद्दों पर गतिरोध बना रहा। बुधवार को सरकार और किसान संघों के बीच छठे दौर की वार्ता लगभग पांच घंटे चली थी। इस बैठक में बिजली दरों में वृद्धि और पराली जलाने पर दंड को लेकर किसानों की चिंताओं को हल करने के लिए कुछ सहमति बनी थी।