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रफाल डील पर सुप्रीम कोर्ट में 5 घंटे चली सुनवाई, सीजेआई ने जांच पर सुरक्षित रखा फैसला

केंद्र सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में रफाल डील से संबंधित सभी जानकारियों एक सीलबंद लिफाफे में पेश की थी।

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नई दिल्ली। रफाल सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगभग 5 घंटे तक चली सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने अपने अहम फैसले को सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले से संबंधित सभी याचिकाओं पर सुनवाई की और 5 घंटे चली सुनवाई के बाद सभी याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। आपको बता दें कि पिछले दिनों केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रफाल सौदे से संबंधित पूरी जानकारी एक सीलबंद लिफाफे में पेश की थी, जिसपर आज सुनवाई हुई।

रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान सभी संबंधित पक्षों की दलीलों को सुना। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और सरकार के साथ-साथ वायुसेना अधिकारियों की भी बात को ध्यान से सुना। हालांकि सीजेआई रंजन गोगोई ने रक्षा मंत्रालय का पक्ष सुनने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हम वायुसेना से मामले की सुनवाई कर रहे हैं इसलिए एयरफोर्स का कोई अधिकारी आकर अपनी जरूरतें बताए। सूत्रों के मुताबिक कोर्ट को जानकारी दी गई कि कुछ देर में एयरफोर्स के एक अधिकारी आ रहे हैं। सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने वायुसेना के एयर मार्शल और उप-एयर मार्शल से कहा, कोर्ट में अलग तरह की लड़ाई होती है इसलिए आप जाइए और युद्ध के मैदान में अपना कौशल दिखाइए।

सुबह करीब 11 बजे से शुरू हुई सुनवाई लंच ब्रेक के बाद करीब 3:15 बजे तक चली। इस दौरान शिकायतकर्ताओं के अलावा कोर्ट ने सरकार और वायुसेना के अधिकारियों का भी पक्ष सुना। कोर्ट ने बहस के दौरान कहा कि हम इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय की ना सुनकर वायुसेना के अधिकारियों का पक्ष जानना चाहेंगे, तभी तत्काल प्रभाव से वायुसेना के अधिकारियों को बुलाया गया। वायुसेना के अधिकारी भी अपना पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

आपको बता दें कि याचिकाकर्ताओं ने रफाल मामले की जांच का आदेश देने की याचिका दाखिल की है। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने अपना—अपना पक्ष रखा। लंबी चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने रफाल मामले में सभी का पक्ष सुनकर फैसला सुरक्षित रखा लिया है। फैसला बाद में सुनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान रंजन गोगोई ने कहा कि रफाल सौदे की कीमतों पर तभी कोई बहस हो सकेगी, जब कोर्ट यह तय करेगी कि उन पहलुओं का सार्वजनिक होना जरूरी है।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बहस में केंद्र की ओर से कोर्ट को सौंपे गए सीलबंद लिफाफे में केवल विमानों की कीमत बताने की जानकारी देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच इस समझौते की जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि इस सौदे की कीमतों के बारे में नहीं बल्कि इसके तकनीकी और रक्षा पहलू को लेकर जानकारी गोपनीय रखी गई है।

आपको बता दें कि इससे पहले सीजेआई ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि 'हम आपको पूरी सुनवाई का मौका दे रहे हैं। इसका सावधानीपूर्वक इस्तेमाल कीजिए, केवल जरूरी चीजों को ही कहिए।' इसके बाद सुनवाई के दौरान उन्होंने न्यायालय से कहा, 'सरकार गोपनीयता प्रावधान की आड़ ले रही है, उसने राफेल विमानों की कीमत का खुलासा नहीं किया है।' आपको बता दें कि प्रशांत भूषण अपनी और दो पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी की ओर से कोर्ट में बहस कर रहे थे। भूषण ने कोर्ट में एक दस्तावेज दाखिल किया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एक गलती पकड़ते हुए कहा कि जल्दबाजी में वो गलत जानकारी न दें। इसके बाद भूषण ने स्वीकार किया कि जल्दबाजी में उनसे गलती हुई है।

Published on:
14 Nov 2018 04:45 pm
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