पश्चिमी दिल्ली के डीएम ने जांच में मामले को सही पाया लापरवाही की बात सामने आने पर दिया एफआईआर का निर्देश दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर शुरू की कार्रवाई
नई दिल्ली। एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार कोराना को हराने में जुटी है तो दूसरी तरफ दिल्ली के निजी अस्पतलों में सरकारी नियमों की अनदेखी जारी है। ऐसा ही एक मामला सामने आने के बाद एक बड़े अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अस्पताल प्रबंधन पर कोरोना वायरस संबंधी मामले में लापरवाही बरतने और भारत सरकार की गाइडलाइंस का उल्लंघन करने का आरोप है। दो अलग-अलग मामले में में प्रशासन ने शुरुआती जांच के बाद दिल्ली पुलिस से FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।
प्रारंभिक जांच के बाद मिले आदेश पर दिल्ली पुलिस ने महाराजा अग्रसेन अस्पताल पर FIR दर्ज कर ली है। पहले मामले में रोहतक की एक 72 साल की महिला 10 मार्च को अस्पताल में भर्ती हुई। इस महिला को बाद में गंगाराम रेफर कर दिया जहां पर महिला को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इस घटना के बाद सीडीएमओ के कहने पर हॉस्पिटल ने उस महिला के 5 मीटर के दायरे में आए हुए सभी मरीजों और 82 मेडिकल स्टॉफ का टेस्ट करवाया। इसमें अस्पताल के मेडिकल स्टाफ के डॉक्टर समेत 6 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए।
दूसरे मामले में सोनीपत के एक शख्स को अस्पताल ने उसी वार्ड में एडमिट किया जहां कोरोना पॉजिटिव था और जिसकी 4 अप्रैल को मौत हो गई। अस्पताल ने बिना प्रशासन को सूचना दिए और भारत सरकार की गाइडलाइंस का उल्लंघन कर कोरोना पॉजिटिव मृतक का पार्थिव शरीर उसके परिवार को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया।
ताज्जुब की बात यह है कि मृतक के परिवार ने भी किसी को इस बात की जानकारी नहीं दी कि मृतक कोरोना पॉजिटिव थे। इसके बाद बहुत से लोगों ने अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। इसके बाद पाया गया कि मृतक का बेटा भी कोरोना पॉजिटिव है।
दोनों मामले की जांच पश्चिमी दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने की थी। जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने महाराजा अग्रसेन अस्पताल के सीनियर एडमिनिस्ट्रेशन मैनेजमेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अस्पताल पर आरोप है कि उसने स्थानीय प्रशासन को सूचना देने में लापरवाही बरती। कोरोना मरीज़ के पार्थिव शरीर को देने में भारत सरकार की गाइडलाइन्स का उल्लंघन किया।