सरकार किसानों के सामने नया प्रस्ताव रख सकती है। कृषि कानूनों के वापसी से कम पर किसान समझौता करने को तैयार नहीं।
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के मुद्दे को लेकर जारी विरोध के बीच शुक्रवार को किसानों और सरकार के बीच अगले चरण की बातचीत हुई, हालांकि यह भी बेनतीजा साबित हुई। बैठक में सरकार और किसान दोनों ही अड़े हुए हैं, जहां सरकार ने इस दौरान साफ कर दिया कि कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे, किसान तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं।
ताजा जानकारी के मुताबिक अब आगामी 15 जनवरी को सरकार और किसान नेताओं के बीच अगले दौर की बैठक आयोजित की जाएगी। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को आयोजित बैठक में सरकार ने किसानों से कहा कि सुप्रीम कोर्ट अब फैसला करे तो ही बेहतर है। इसकी वजह कई दौर की वार्ता होने के बावजूद सभी का बेनतीजा रहना और रास्ता न निकलना है।
दिल्ली बॉर्डर पर 44 दिनों से कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन जारी है। केंद्र सरकार और किसान संघों के नेताओं के बीच आठवें दौर की बातचीत शुरू हो चुकी है। दोनों पक्षों से समाधान निकलने की उम्मीद जताई गई है। लेकिन इस बात की संभावनाएं कम हैं। ऐसा इसलिए कि किसान नेता मुख्य मांगों से जरा सा भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
कृषि मंत्री ने अमित शाह से मुलाकात की
हालांकि, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर बैठक शुरू होने से पहले इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से मिले हैं। दोनों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई है। वहीं केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने भी समस्या का समाधान निकलने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कानूनों में संशोधन के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि केंद्र किसानों के सामने आज कुछ प्रस्ताव रख सकती है। अगर किसानों ने इस पर सकारात्मक रुख का परिचय दिया तो समाधान निकलेगा। केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा है कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी।