सरकार के फैसले को चुनौती देने के लिए तंबाकू कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
नई दिल्ली। सिगरेट और तंबाकू आदि के पैकेट पर जागरूकता की दृष्टि से वैधानिक चेतावनी देने के लिए सरकार ने नई तस्वीर छापने का आदेश दिया था। सरकार के इस फैसले को चुनौती देने के लिए तंबाकू कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि देश में मुंह के कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार नई तस्वीर से सिर्फ जानकारी दे रही है। जस्टिस चंद्रचूड ने कहा कि इस तस्वीर में गलत क्या है। सुप्रीम कोर्ट अगस्त के पहले हफ्ते में सुनवाई करेगा।
...ऐसा होगा नया चित्र
केंद्र सरकार ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है कि 1 सितंबर 2018 से तंबाकू के सामानों पर चेतावनी के लिए नई तस्वीर छपेगी, जिसमें एक व्यक्ति के गले में छेद दिखाया जाएगा और लिखा होगा कि तंबाकू से गले का कैंसर होता है। इसे तंबाकू कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है कि ये उनके व्यापार करने के अधिकार का हनन है।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई थी रोक
इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने सिगरेट और तंबाकू के पैकेटों पर 85 फीसदी हिस्से में वैधानिक चेतावनी देने वाले नियम को रद्द कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि सिगरेट की वजह से स्वाथ्य संबंधी परेशानी और कैंसर होता है। सिगरेट और तंबाकू के पैकेटों पर 85 फीसदी हिस्से में वैधानिक चेतावनी देने नियम सही है। केंद्र ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई जाए और उसे रद्द किया जाए।
तंबाकू कंपनियों की तरफ से बोले सिब्बल...
सिगरेट कंपनियों की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार के पक्ष का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘85 फ़ीसदी वैधानिक चेतावनी वाला नियम लगाते समय कोई अध्ययन नहीं किया गया था। अगर केंद्र सरकार को लगता है कि ये स्वास्थ्य के लिए इतना हानिकारक है तो इस पर रोक क्यों नही लगा देती है। सरकार बिक्री पर रोक नहीं लगा सकती तो हम वैधानिक चेतावनी को चुनौती दे सकते हैं। 2014 से पहले वैधानिक चेतावनी केवल 40 फीसदी हिस्से पर ही थी। इसी बीच राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई और कोर्ट ने इसे 80 फीसदी करने को कहा। जिस पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने 85 फीसदी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से संबंधित सभी याचिकाओं को कर्नाटक हाईकोर्ट भेज दिया था और हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आया।' हालांकि उन्होंने 50 फीसदी वैधानिक चेतावनी के नियम को लागू करने पर सहमति जताई।