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जेल प्रशासन की अनूठी पहल: कैदी बनाएंगे खाना, ऑनलाइन ऑर्डर से होगी होम डिलीवरी

कैदियों को रोजगागर देने के लिए चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल प्रशासन ने एक अच्ची पहल की है। अब कैदी जेल में लजीज खाना बनाएंगे और लोग उसे अॉनलाइन अपने घर भी मंगवा सकते है।
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Updated: 28 Jun 2018, 3:52 PM IST
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नई दिल्ली। होटलों का लजीज खाना तो आपने खाया ही होगा, लेकिन अगर आपको जेल का खाना खाने को मिले तो क्या आप खाएंगे, शायद नहीं। लेकिन कैदियों के हाथों से बना लजीज खाना आपको खाने को मिले तो शायद ही आप खाने से मना करें। जीं हां अब आप होटलों की तरह जेल से भी कैदियों के हाथ का बना खाना घर मंगवा सकते हैं। इसके लिए आपको जेल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ना ही ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।

जेल की वेबसाइट पर लॉग इन कर मंगवाएं खाना

दरअसल, चंडीगढ़ की बुड़ैल मॉडल जेल ने ये सुविधा शुरू की है। खाना मंगवाने के लिए आपको सिर्फ बुडै़ल मॉडल जेल की वेबसाइट पर लॉग इन करना है। इसके बाद आप ऑनलाइन अपने मनपसंद अलग-अलग व्यजंन बुक कर मंगवा सकते हैं। बता दें कि यह खाना जेल का स्टाफ आपके घर तक पहुंचाएगा।

मेन्यू में गुलाब जामुन, बेसन बर्फी समेत कई मिठाइयां भी शामिल

इस सुविधा के लिए जेल प्रशासन ने स्पेशल मेन्यू भी तैयार किया है। मेन्यू में स्पेशल थाली समेत गुलाब जामुन, बालूशाही, बेसन बर्फी गुलाब जामुन समेत कई मिठाइयां भी शामिल हैं। बता दें कि देश में चंडीगढ़ की यह एक मात्र मॉडल जेल है जिसकी वेबसाइट पर जाकर आप अपनी पसंद का खाना मंगवा सकते है।

कैदियों को रोजगार देना हमारा उद्देश्य

वहीं, इस बारे में बताते हुए जेल प्रशासन ने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ कैदियों को रोजगार देना है और जब कैदी अपनी सजा काटकर जेल से बाहर निकलें तो वे फिर से अपराधी ना बनें। वे अपना खुद का रोजगार कर सकें, जिसकी शुरुआत चंडीगढ़ की जेल से हो रही है।

जेल स्टाफ घर तक पहुंचाएगा खाना

आपको बता दें कि वेबसाइट की शुरुआत करीब डेढ़ महीने पहले हुई थी। उसमें सभी व्यंजनों के रेट दिए गए हैं। इस रेट में जीएसटी भी शामिल किया गया है। वहीं, जेल प्रशासन की तरफ से वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन खाना बुक कराने की सुविधा से लेकर उसे घर तक पहुंचाने का पूरा ख्याल रखा गया है।

काम के पैसे कैदियों के खाते में किए जाते हैं ट्रांसफर

चंडीगढ़ के आइजी जेल डॉ. ओपी मिश्र ने बताया कि जेल के खाने के लिए वेबसाइट में ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा जोड़ने के लिए डेढ़ महीने का समय लगा है। इसके लिए कैदियों को ट्रेनिंग भी दी गई है। अब ये ट्रेंड कैदी अलग-अलग तरह के खाने बनाते हैं। मिश्रा ने कहा कि जो कैदी जितना काम करता है, प्रशासन उनके बैंक अकाउंट में उतने पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर कर देता है।

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