नागौर

नागौर…16 साल से कागजों में कैद शहर का विकास: 133 हेक्टेयर पेराफेरी जमीन पर कुण्डली मारकर बैठा है प्रशासन

नागौर. नगरपरिषद को मिलने वाली 133.0886 हेक्टेयर परिधि भूमि पिछले 16 वर्षों से सरकारी फाइलों में अटकी हुई है। राज्य सरकार ने वर्ष 2010 में भूमि हस्तांतरण के आदेश जारी किए, लेकिन आज तक राजस्व विभाग से नगरपरिषद को कब्जा नहीं मिला। इससे सड़क, नाली, पार्क, कचरा प्रबंधन सहित आधारभूत सुविधाओं के विकास प्रभावित है। भूमि मिलने पर नई आवासीय योजनाएं शुरू हो सकती थीं, कॉलोनियों का विकास होता, नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलतीं और शहर का नियोजित विस्तार संभव होता। आदेशों के बावजूद लंबित प्रक्रिया प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है और विकास की रफ्तार थामे हुए बैठी है आज।
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Jun 29, 2026
नागौर शहर
नागौर शहर की स्थिति

2010 में सरकार ने कहा- जमीन नगरपरिषद को दो, पर 133.0886 हेक्टेयर पर आज भी लगा ताला, शहरी विकास की योजनाएं हो रही प्रभावित
नागौर. नगरपरिषद को मानी जाने वाली 133.0886 हेक्टेयर पेराफेरी भूमि पिछले 16 वर्षों से सरकारी फाइलों में कैद है। राज्य सरकार ने वर्ष 2010 में इस भूमि को नगरपरिषद के नाम हस्तांतरित करने के स्पष्ट आदेश जारी किए थे, ताकि सडक़, नाली, पार्क, कचरा प्रबंधन और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास का रास्ता खुल सके। लेकिन आदेशों, पत्राचार और बार-बार भेजे गए स्मरण-पत्रों के बावजूद जमीन आज भी राजस्व विभाग के कब्जे में है। जमीनें मिलती तो फिर शहरी आवासीय योजनाओं का संचालन होता, कॉलोनियां बनती और विकास भी होता।
सरकार का आदेश भी बेअसर
राज्य सरकार ने वर्ष 2010 में स्पष्ट आदेश जारी करते हुए नागौर के नगरीय क्षेत्र में स्थित 133.0886 हेक्टेयर राजकीय भूमि नगरपरिषद को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए थे। उद्देश्य था कि शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा सके। लेकिन आदेश के 16 वर्ष बाद भी एक इंच जमीन नगरपरिषद को नहीं मिली। पूरी भूमि आज भी राजस्व विभाग के नियंत्रण में बनी हुई है। जमीन हस्तांतरण के लिए नगरपरिषद ने लगातार प्रयास किए। 15 जुलाई 2021 को 49 खसरों की सूची तहसीलदार को भेजी गई। 24 सितंबर 2021 को उपखंड अधिकारी को पत्र लिखा गया। 4 नवंबर 2022 को फिर स्मरण-पत्र भेजा गया। प्रशासन शहरों के संग अभियान-2021 के दौरान भी यह मामला उठाया गया। जयपुर स्थित स्वायत्त शासन विभाग, अजमेर स्थित उपनिदेशक कार्यालय और जिला प्रशासन को भी जानकारी दी गई, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद शहरी सेवा शिविर शुरू होने से पूर्व भी प्रशासन को रिमांइडर भेजा इस उम्मीद से ताकि लोगों के लिए योजनागत आवासीय सुविधा का लाभ दिया जा सके, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

49 खसरों में फैली 133.0886 हेक्टेयर भूमि
दस्तावेजों के अनुसार बारानी, गोचर, मगरा, चारागाह और आबादी किस्म की कुल 133.0886 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण के दायरे में आती है। इनमें खसरा नंबर 3 की 22.6543 हेक्टेयर गोचर भूमि सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा खसरा नंबर 367, 252, 167, 512, 516 सहित 49 खसरे शामिल हैं। चैनार, दूदावास, मानासर और अठियासन क्षेत्र की भूमि भी इसी सूची का हिस्सा है। विभागीय जानकारों के अनुसार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 90-क के अनुसार कृषि भूमि का गैर-कृषिक उपयोग नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है। 17 जून 1999 की अधिसूचना व 17 अक्टूबर 2017 के आदेशों में भी नगरीय विकास के लिए भूमि हस्तांतरण की व्यवस्था का उल्लेख है। इसके बावजूद संबंधित भूमि अब तक नगरपरिषद को नहीं सौंपी गई है।
पेराफेरी क्षेत्र के विकास पर लगा ब्रेक
जमीन नगरपरिषद के नाम नहीं होने से पेराफेरी क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हैं। नई सडक़ें नहीं बन पा रही हैं। बच्चों के लिए पार्क विकसित नहीं हो सके हैं। बारिश के दौरान जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण नहीं हो पाया है। कचरा निस्तारण और गंदे पानी के शोधन संयंत्र जैसी योजनाएं भी अटकी हुई हैं। कॉलोनियां बस गईं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका। नगरपरिषद का मानना है कि भूमि हस्तांतरण होने के बाद ही शहर के विकास कार्यों को गति मिल सकेगी। ऐसे में अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से लंबित इस प्रक्रिया को पूरा कर प्रशासन पेराफेरी क्षेत्र की जमीनें नगरपरिषद को कब सौंपेगा।
प्रयास किया जा रहा है, सफलता मिलेगी……..
नगरपरिषद की ओर से पेराफेरी क्षेत्र की जमीनों के हस्तांतरण के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए प्रक्रिया भी और तेज कर दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही पूरा एरिया नगरपरिषद को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
गोविंद सिंह भींचर, आयुक्त नगरपरिषद नागौर49 खसरों में फैली 133.0886 हेक्टेयर भूमि
दस्तावेजों के अनुसार बारानी, गोचर, मगरा, चारागाह और आबादी किस्म की कुल 133.0886 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण के दायरे में आती है। इनमें खसरा नंबर 3 की 22.6543 हेक्टेयर गोचर भूमि सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा खसरा नंबर 367, 252, 167, 512, 516 सहित 49 खसरे शामिल हैं। चैनार, दूदावास, मानासर और अठियासन क्षेत्र की भूमि भी इसी सूची का हिस्सा है। विभागीय जानकारों के अनुसार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 90-क के अनुसार कृषि भूमि का गैर-कृषिक उपयोग नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है। 17 जून 1999 की अधिसूचना व 17 अक्टूबर 2017 के आदेशों में भी नगरीय विकास के लिए भूमि हस्तांतरण की व्यवस्था का उल्लेख है। इसके बावजूद संबंधित भूमि अब तक नगरपरिषद को नहीं सौंपी गई है।
पेराफेरी क्षेत्र के विकास पर लगा ब्रेक
जमीन नगरपरिषद के नाम नहीं होने से पेराफेरी क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हैं। नई सडक़ें नहीं बन पा रही हैं। बच्चों के लिए पार्क विकसित नहीं हो सके हैं। बारिश के दौरान जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण नहीं हो पाया है। कचरा निस्तारण और गंदे पानी के शोधन संयंत्र जैसी योजनाएं भी अटकी हुई हैं। कॉलोनियां बस गईं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका। नगरपरिषद का मानना है कि भूमि हस्तांतरण होने के बाद ही शहर के विकास कार्यों को गति मिल सकेगी। ऐसे में अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से लंबित इस प्रक्रिया को पूरा कर प्रशासन पेराफेरी क्षेत्र की जमीनें नगरपरिषद को कब सौंपेगा।
प्रयास किया जा रहा है, सफलता मिलेगी……..
नगरपरिषद की ओर से पेराफेरी क्षेत्र की जमीनों के हस्तांतरण के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए प्रक्रिया भी और तेज कर दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही पूरा एरिया नगरपरिषद को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
गोविंद सिंह भींचर, आयुक्त नगरपरिषद नागौर

Updated on:
29 Jun 2026 10:17 pm
Published on:
29 Jun 2026 10:17 pm