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नागौर…बड़ली बना अघोषित रीको, रिहायशी इलाके में धड़ल्ले से चल रहीं फैक्ट्रियां

नागौर.शहर का बड़ली क्षेत्र अघोषित रूप से रीको एरिया का रूप लेता जा रहा है। आवासीय इलाकों के बीच और उनके आसपास लगातार व्यवसायिक गतिविधियां संचालित होने से शहरी टाउनशिप योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कई स्थानों पर फैक्ट्रियों और व्यावसायिक इकाइयों के संचालन से स्थानीय लोगों को प्रदूषण, शोर और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है। नियोजन के विपरीत बढ़ रही इन गतिविधियों से आवासीय क्षेत्र की मूल अवधारणा प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
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Nagaur: Smoke rising from a factory in the Badli area.

Nagaur. Factory in Badli area

. आग जैसी आपदा की स्थिति में बड़े हादसे की आशंका, जिम्मेदारों की कार्यशैली संदेहों के कठघरे में
तीन अधिकृत औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद कृषि और आवासीय भूमि पर बढ़ता उद्योगों का फैलाव

नागौर. शहर का बड़ली एरिया अघोषित रूप से रीको एरिया बन गया है। इस एरिया में आवासीय क्षेत्रों के नजदीक एवं इनके बीच व्यवसायिक गतिविधियों के संचालन से अब शहरी टाउनशिप योजना के क्रियान्सचयन पर पानी फिरता नजर आने लगा है। सरकारी रिकॉर्ड में यह न तो अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र है, और न ही रीको का औद्योगिक क्षेत्र, लेकिन इसके बाद भी यहां रिहायशी और कृषि भूमि के बीच वर्षों से दर्जनों औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। यह स्थिति तब है जबकि गत दिनों लखनऊ में स्पार्किंग के बाद कइयों की जान चली गई, लेकिन इसके बाद भी नागौर का प्रशासन अभी नहीं चेता। ऐसे में नियमों को ताक पर रखकर चल रही इन फैक्ट्रियों से कभी भी बड़ा हादसा हुआ तो फिर कौन जिम्मेदार होगा…! इससे जिम्मेदारों की कार्यशैली खुद-ब-खुद संदेहों के कठघरे में आ जाती है कि जब शहर में उद्योगों के लिए पृथक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा चुके हैं, तब इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का लगातार विस्तार किस आधार पर हो रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही से बिगड़ रही स्थिति
राज्य सरकार ने नागौर शहर के नियोजित औद्योगिक विकास के लिए बासनी रोड, बीकानेर रोड तथा गोगलाव के पास विधिवत औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए हैं। इन क्षेत्रों में सभी मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षा मानक तय हैं। इसके बावजूद बड़ली क्षेत्र में बिना अधिसूचना के बड़े स्तर पर उद्योग संचालित होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। नियमों का पालन करने वाले उद्योगपतियों का कहना है कि जब अवैध रूप से चल रही इकाइयों पर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो वैध तरीके से उद्योग लगाने का औचित्य ही क्या रह जाता है। कार्रवाई नहीं होने के चलते बड़ली क्षेत्र में उद्योगों का संचालन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है। बताते हैं कि क्षेत्र में 40 से अधिक हैंडटूल्स निर्माण इकाइयों के अलावा भुजिया फैक्ट्री सहित कई अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हैं। यह पूरा क्षेत्र अघोषित रूप से कथित रूप से मिलीभगत के चलते अब औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में इसकी पहचान अब भी आवासीय एवं कृषि भूमि वाले क्षेत्र के रूप में है।
एनओसी और वैधानिक स्वीकृतियों पर भी उठे सवाल
रिहायशी और कृषि भूमि पर संचालित औद्योगिक इकाइयों को लेकर अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी), भूमि उपयोग परिवर्तन, भवन स्वीकृति तथा अन्य आवश्यक वैधानिक अनुमतियों को लेकर भी संदेह गहराता जा रहा रहा कि बिना एनओसी इनका संचालन आखिर हो कैसे रहा है कि जबकि किसी भी औद्योगिक कारखाने को लगाने से पहले जमीन का उपयोग बदलवाने की मंजूरी और नगर निकाय से भवन का नक्शा पास करवाना जरूरी होता है। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण मंडल से कारखाना बनाने और चलाने की सहमति लेनी पड़ती है। आग से बचाव के लिए दमकल विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही कारखाना शुरू करने के लिए श्रम विभाग से अनुज्ञा पत्र, बिजली-पानी के कनेक्शन की मंजूरी और वस्तु एवं सेवा कर का पंजीयन करवाना पड़ता है। स्थानीय निकाय से व्यापार करने का अनुज्ञा पत्र भी जरूरी है। खाद्य या भट्टी वाले कारखानों के लिए अलग से विशेष अनुज्ञा पत्र लेना होता है। बिना इन मंजूरियों के कारखाना चलाना संचालन होने से साफ है कि इसमें जिम्मेदारों की ओर से इनको खुली छूट मिली हुई है। अब ऐसे में यदि किसी इकाई में आग या अन्य औद्योगिक दुर्घटना होती है तो उसका असर आसपास के क्षेत्र तक पहुंच सकता है। ऐसे में सुरक्षा मानकों के हिसाब से कार्रवाई नहीं की गई तो फिर आने वाले समय में स्थिति विकट हो सकती है।

हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भी स्थिति जस की तस
हाल ही में जोधपुर उच्च न्यायालय ने रिहायशी क्षेत्रों में संचालित औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने और ऐसे संचालन पर रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद बड़ली क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां जारी हैं। ऐसे में संबंधित विभागों की ओर से अब तक की गई कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है, जबकि राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट रूप से ऐसी सभी गतिविधियों की जांच के लिए भी निर्देश हैं कि आवासीय क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों का संचालन नहीं होना चाहिए। बड़ली क्षेत्र में संचालित औद्योगिक इकाइयों की वैधानिक स्थिति, भूमि उपयोग, अग्नि सुरक्षा, भवन स्वीकृतियों और अन्य आवश्यक अनुमतियों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों की ओर से जांच होनी चाहिए। जांच से ही सही तस्वीर सामने आ सकेगी। सकेगी। जिला प्रशासन, नगर परिषद, रीको, राजस्व विभाग और अग्निशमन विभाग के स्तर पर इसकी इन पहलुओं से जांच करनी चाहिए कि क्षेत्र में संचालित इकाइयां सभी नियमानुसार स्वीकृतियों के साथ चल रही हैं या कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है…!
जिम्मेदार बोले…..कार्रवाई करेंगे
यदि रिहायशी क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयां नियमों के विपरीत संचालित हो रही हैं तो मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में अनियमितता मिलने पर संबंधित विभागों के समन्वय से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गोविंद सिंह भींचर, आयुक्त एवं उपखण्ड अधिकारी नागौर